बाल आयोग में 2018 में 301 मामले आए, जिसमें सिर्फ 89 मामलों का निराकरण हुआ

भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

मप्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग में जनवरी 2018 से अब तक 301 शिकायतें प्रदेशभर से पहुंचीं, लेकिन सिर्फ 89 मामलों का निराकरण हो पाया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाल आयोग द्वारा की गई अनुंशसा फाइलों तक ही सिमट जाती हैं। आयोग में की गई शिकायतों में पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता। इसमें सबसे ज्यादा मामले जेजे एक्ट के 94 आए हैं, जिसमें निराकरण 20 में हुआ है। वहीं आरटीई के 69 मामले आए हैं और निराकरण 22 में हुआ है। आंकड़े बताते हैं कि प्राप्त शिकायतों में से आधे मामलों में भी निराकरण नहीं होता। हालांकि कई मामले निजी स्कूलों के खिलाफ पहुंचते हैं, लेकिन आयोग की अनुंशसा को निजी स्कूल भी अनदेखी कर रहे हैं। कई मामले आयोग में 6-7 महीने पहले आए हैं, लेकिन पीड़ित बच्चों को न्याय नहीं मिला है।

सरकारी विभाग में भी करता है अनदेखी

बाल आयोग में आरटीई के प्रदेशभर से 69 मामले आए हैं, लेकिन आयोग इन शिकायतों से संबंधित स्कूल शिक्षा विभाग को अनुंशसा पत्र जारी करता है, लेकिन विभाग अनदेखी करते हैं। आयोग ने लोक शिक्षण संचालनालय और राज्य शिक्षा केंद्र को आरटीई से संबंधित शिकायतों पर प्रदेश के निजी स्कूलों में नामांकन हुए पात्र बच्चों की सूची दो माह पहले मांगी थी, लेकिन अभी तक आयोग के पास सूची नहीं पहुंची है। साथ ही आरटीई से संबंधित अभिभावकों की शिकायतों पर कोई भी कार्यवाही स्कूलों के खिलाफ नहीं हुई है।

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केस-1

रोहित नगर स्थित सागर पब्लिक स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ने वाला बच्चे का जूडो प्रशिक्षक की लापरवाही के कारण जूडो सिखते वक्त पैर फ्रैक्चर हो गए। इसके अलावा स्कूल के खिलाफ चार अन्य अभिभावकों ने बाल आयोग में शिकायत की । इसमें स्कूल के खिलाफ कार्यवाही करने की आयोग ने अनुंशसा की, लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।

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केस- 2

अयोध्या बायपास निवासी अभिभावक ने राजीव नगर स्थित क्वीन मेरीज सीनियर सेकेण्डरी स्कूल के खिलाफ बाल आयोग में शिकायत की थी । अभिभावक ने शिकायत की थी कि 7वीं में पढ़ने वाले बेटे को गाना नहीं गाने के नाम पर क्लास टीचर द्वारा पिटाई करने पर कोई कार्यवाही नहीं की गई।

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वर्जन

- जितने मामले आए हैं, उसमें संबंधित विभाग को अनुंशसा करते हैं। कई मामलों का निराकरण भी होता है, लेकिन सरकारी विभागों से संबंधित कई मामलों में देरी होती है।

ब्रजेश चौहान, सदस्य, बाल आयोग

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बॉक्स में

प्रदेश का आंकड़ा

जनवरी 2018 से अक्टूबर तक - 301 शिकायत

कुल निराकरण- 89

लंबित प्रकरण - 219

आरटीई- 69 , निराकरण- 22

जेजे - 94 , निराकरण- जेजे- 20

पॉक्सो- 36 , निराकरण- 8

अन्य मामले- 94 , निराकरण- 24

अग्राह - 8

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भोपाल का आंकड़ा

जनवरी 2018 से अक्टूबर तक - 136

कुल निराकरण - 53

आरटीई- 29 , निराकरण- 16

जेज - 34 , निराकीण- 12

पॉक्सो- 9 , निराकरण- 3

अन्य- 58, निराकरण- 16

अग्राह- 6