डबरा। नईदुनिया प्रतिनिधि

एक किसान की जमीन के खसरे नंबर पर गलत नाम अंकित हो जाना सिस्टम की गलती है न कि किसान की। किसान के आवेदन पर तहसीलदार ने नाम संशोधन करने का आदेश पारित कर दिया। आदेश की प्रति अपने हाथों में लेकर किसान पिछले तीन साल से पटवारी के चक्कर काट रहा है। लेकिन पटवारी न तो किसान की परेशानी को समझ रहे हैं और न ही तहसीलदार के आदेश का पालन कर रहे हैं। पटवारियों का इतना निकम्मापन मैंने पहले कभी नहीं देखा। यह बात जनसुनवाई में खसरे में नाम संशोधन कराने की गुहार लेकर आए किसान की बात सुनकर एसडीएम प्रदीप कुमार शर्मा ने जनसुनवाई में मौजूद आरआई और अन्य विभागीय अधिकारियों से कही।

मंगलवार को एसडीएम प्रदीपकुमार शर्मा ने तहसील सभागार में विकासखंड के सभी विभागों के प्रमुख अधिकारियों के साथ जनसुनवाई की। वहां शिकायत लेकर पहुंचे विर्राट गांव के किसान ज्ञानसिंह बघेल ने एसडीएम प्रदीपकुमार शर्मा को खसरे में नाम संशोधन के लिए तीन साल पूर्व तहसीलदार द्वारा दिए गए आदेश की प्रति दिखाते हुए शिकायत की कि पटवारी मानसिंह शाक्य खसरे में मेरे नाम का संशोधन नहीं कर रहा है। किसान की इस बात को सुनकर एसडीएम श्री शर्मा काफी नाराज हुए और संबंधित वृत के आरआई को निर्देशित किया कि एक घंटे के अंदर पटवारी मानसिंह शाक्य को बुलाओ और इसी वक्त किसान के नाम का संशोधन कराइए। आधा घंटे के भीतर तहसील कार्यालय पहुंचे पटवारी ने नाम में संशोधन कर किसान की समस्या का हल किया। उल्लेखनीय है कि विर्राट के किसान ज्ञनसिंह बघेल की जमीन के खसरे नंबरों पर गलती से रामसिंह नाम अंकित हो गया था। इसका संशोधन कराने के लिए वह अप्रैल 2015 में पारित तहसीलदार के आदेश की प्रति लेकर पटवारी मानसिंह शाक्य के चक्कर काट रहे थे। इसी प्रकार जनसुनवाई में आई राजस्व, बिजली, पानी और अन्य प्रकार की शिकायतों को सुनने के बाद उनका जल्द से निराकरण कराए जाने के लिए एसडीएम श्री शर्मा ने संबंधित विभागों के प्रमुख अधिकारियों को निर्देशित किया।

अवलोकन के लिए रिकार्ड उपलब्ध कराया जाए

जनसुनवाई के दौरान आई राजस्व संबंधी शिकायतों पर चर्चा के दौरान आरआई और राजस्व विभाग के अन्य अधिकारियों ने एसडीएम श्री शर्मा को अवगत कराया कि पुराने रिकार्ड का अवलोकन करने के लिए जब आरआई और पटवारी तहसील के रिकार्ड रूम में जाते हैं, तो रिकार्ड रूम प्रभारी की ओर से अवलोकन किए जाने के लिए तहसीलदार की मंजूरी मांगी जाती है। इस बात को सुनकर एसडीएम श्री शर्मा ने रिकार्ड रूम प्रभारी को बुलाकर निर्देशित किया कि इस कार्य के लिए तहसीलदार की मंजूरी अनिवार्य नहीं है। नायब तहसलीदार की मौखिक मंजूरी पर ही रिकार्ड उपलब्ध कराया जाए। इससे राजस्व विभाग के जमीनी अमले को अपना कार्य करने में कोई परेशानी नहीं आए।

शासकीय भूमि पर नहीं होंगे धार्मिक निर्माण

जनसुनवाई के दौरान एसडीएम श्री शर्मा ने नायब तहसीलदार और सभी वृतों के राजस्व निरीक्षकों को निर्देशित किया कि वे अपने अधीन आने वाले पटवारियों को पत्र लिखकर निर्देशित करें कि उनके हल्का क्षेत्र में मौजूद शासकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का धार्मिक निर्माण नहीं हो पाए। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार शासकीय भूमि पर किसी भी प्रकार के धार्मिक स्थल का निर्माण पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। इसे रोकने की जिम्मेदारी हलका पटवारियों की है। अगर किसी भी हल्के में ऐसा पाया जाता है तो निर्माण करने वाले व्यक्ति अथवा समुदाय विशेष के अलावा संबंधित पटवारी पर भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

विभागीय अधिकारी और कर्मचारियों की मांगी जानकारी

जनसुनवाई में मौजूद सभी विभाग प्रमुखों को निर्देशित करते हुए एसडीएम श्री शर्मा ने कहा कि मुझे अगली जनसुनवाई तक सभी विभागों के ए ग्रेड से लेकर चतुर्थ श्रेणी तक के अधिकारियों और कर्मचारियों की जानकारी उनके मोबाइल नंबरों सहित पैन ड्राइव में उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि सभी विभागों की ओर से चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी भी योजनाओं के उद्देश्य सहित उपलब्ध कराई जाए। अगर योजनाओं के क्रियान्वन में अन्य विभागों के साथ समन्वय नहीं बैठ पा रहा हो, तो मुझे अवगत कराया जाए।

वाटर हार्वेस्टिंग के लिए की अपील

जनसुनवाई के दौरान एसडीएम श्री शर्मा ने विभागीय अधिकारियों से अनौपचारिक चर्चा में कहा कि सभी शासकीय आवासों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित किया जाए, तो कम होते जलस्तर को स्थिर किया जा सकता है। इस बात पर वहां मौजूद सभी विभागों के प्रमुख अधिकारियों ने शासकीय आवासों में रेन वाटर हार्वेस्टर सिस्टम विकसित करने की योजना बनाए जाने का भरोसा दिलाया।