बीयू को हर साल 110 करोड़ रुपए इंकम होता था, इसमें से 10 करोड़ रुपए की बचत होती थी

भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

अगले से साल से बरकतउल्ला विवि (बीयू) सहित सभी विवि में सेमेस्टर सिस्टम खत्म करने की तैयारी चल रही है। बीयू को सेमेस्टर सिस्टम में विद्यार्थियों से परीक्षा व एक्टिविटी शुल्क मिलाकर 110 करोड़ रुपए मिलते थे। इसमें सारे खर्चे निकालकर उसे हर साल 10 करोड़ रुपए की बचत हो जाती थी। अब अगले साल से उसकी यह कमाई बंद हो जाएगी, जिससे वित्तीय भार बढ़ जाएगा।

विवि में एक नियमित विद्यार्थी से 1110 रुपए परीक्षा शुल्क और 120 रुपए एक्टिविटी फीस ली जाती है। इस तरह से बीयू से संबद्घ 140 कॉलेज हैं। इसमें 1 लाख 25 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। वहीं प्रायवेट छात्रों से 1650 रुपए परीक्षा शुल्क लेता है। इससे विवि को लगभग 110 करोड़ रुपए मिल जाते थे। सेमेस्टर प्रणाली खत्म होने से ये कमाई का जरिया बंद हो जाएगा। विवि 10 करोड़ रुपए बचाकर एफडी कराता था या विवि में होने वाले मेंटेनेंस पर खर्च करता था। इसके अलावा विवि में सातवां वेतनमान लागू होने से खर्चे बढ़ गया है। इसके अलावा आउटसोर्स पर सफाई और सुरक्षा व्यवस्था देने से वित्तीय भार काफी बढ़ गया। शासन से बीयू को 3 करोड़ 90 लाख रुपए यूनिवर्सिटी फंड के रूप में सलाना मिलते हैं। इसमें से हर माह साढ़े तीन करोड़ रुपए तो प्रोफेसरों, वाइसचांसलर, विभागाध्यक्षों के वेतन पर ही खर्च हो जाते थे। वहीं सातवां वेतनमान लागू होने से करीब 4 करोड़ रुपए सैलरी का खर्च हर माह विवि का बढ़ गया है। अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय भार बढ़ने से बीयू के खर्चे पूरे करना मुश्किल हो जाएगा।

उत्तरपुस्तिका पर सवा करोड़ रुपए खर्च

विवि हर साल 30 लाख उत्तरपुस्तिका खरीदने में सवा करोड़ रुपए खर्च करता है। इससे भी विवि का भार बढ़ा है, जबकि विवि में प्रिंटिग प्रेस है, जो बंद पड़ी है। अगर प्रेस में आधुनिक मशीन लग जाए तो विवि उत्तरपुस्तिक के साथ रजिस्टर व अन्य सामग्री भी छाप सकता है।

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इस संबंध में जानकारी लेकर आय-व्यय का आंकलन किया जाएगा। इसके बाद विवि की आमदनी बढ़ाने को लेकर प्रयास किए जाएंगे।

प्रो. आरजे राव, कुलपति बीयू