अटूट विश्वास से होता है भक्त और भगवान का मिलनः अन्नया शर्मा

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कै प्शन। कथा का वाचन करते हुए कथावाचक।

सिवनीमालवा। भगवान के प्रति भक्त का विश्वास अटूट है तो भगवान और भक्त का मिलन कि सी भी स्थिति में संभव है। नरसिंह मेहता की अटूट श्रद्धा और दृढ़ विश्वास के कारण ही भगवान श्रीकृष्ण को 52 बार अपने भक्त से मिलने आना पड़ा। यह प्रवचन व्यास गादी से राधा स्वरुपा अन्नया शर्मा ने कहे। उन्होंने कथा को विस्तार देते हुए बताया कि एक बार भगवान श्रीकृष्ण भोजन कर रहे थे, रुकमणी जी भोजन परोस रही थी पहला ही ग्रास भगवान ने मुंह में लिया ही था कि उसे थाली में रख कर दौड़ते हुए महल से बाहर जाने लगे। यह स्थिति देख रुकमणी सहित समस्त पटरानियों को आश्चर्य हुआ। थोड़ी देर बाद श्रीकृष्ण वापस महल आए तो रानियों ने पूछा की प्रभू आप भोजन को छोड़कर कहां चले गए थे। श्रीकृष्ण ने कहा कि मेरे एक भक्त को कु छ लोग लाठी से मार रहे थे तो मुझे उसे बचाना जरुरी था इसलिए मैं यहां से गया लेकि न जैसे ही महल के बाहर पहुंचा तो देखा कि मेरा भक्त भी लाठी उठा कर लड़ाई करने लगा है तो मैं लौट कर आ गया । जब तक मेरा भक्त मुझ पर आश्रित रहता है मैं उसकी सदा रक्षा करता हूं और मेरा भक्त जब स्वयं अपनी रक्षा करने लगता है तो मैं उसकी चिंता छोड़ देता हूं। इसलिए आशा एक रामजी से दूजी आशा छोड़ दे। नानी बाई के मायरे में संगीतमय भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमें। ग्राम जीरावेह में चल रहे धार्मिक आयोजन में नानी बाई के मायरे में शहर सहित ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में श्रद्धलुओं ने कथा का श्रवण कि या।श्री ठाकु र जी मंदिर समिति के सदस्यों ने व्यास गादी की पूजा अर्चना की। गुरुवार को कथा में नरसिंह जी मेहता ने द्वारिकाधीश के नाम हुंडी लिखी। सिवनीमालवा ब्राह्मण महिला मंडल ने व्यास गादी पर कथा वाचिका अन्नया शर्मा का साफा पहना कर सम्मान कि या।