मल्टीमीडिया डेस्क। पिछले कुछ वर्षों से देश में भी 'वर्क फ्रॉम होम' कल्चर का क्रेज देखा जा रहा है। लोगों को वर्चुअल एम्प्लॉयी (वीई) के तौर पर घर बैठकर काम करना खूब रास आ रहा है। उन प्रोफेशनल्स के लिए ट्रेंड बहुत सुविधाजनक है, जो अपनी पर्सनल लाइफ के कारण करियर से ब्रेक ले चुके हैं या जो घर-परिवार में बड़े-बुजुर्गों को संभालने के साथ-साथ अपनी सुविधानुसार काम भी करना चाहते हैं। आइए जानें, वर्चुअल एम्प्लॉयी के रूप में बढ़ते इस कल्चर के साथ खुद को कैसे आगे बढ़ाएं...

आपने वर्चुअल असिस्टेंट के बारे में शायद सुना होगा। यह शब्द वैसे तो काफी समय से चर्चा में है, लेकिन जब से टिम फेरिस की बेस्ट सेलर बुक 'द 4 हॉवर वर्क वीक' आई, तब से इसकी लोकप्रियता और बढ़ गई है। इस किताब में यह बताया गया है कि आपको अपने महत्वपूर्ण कार्यों पर खुद कैसे फोकस करना चाहिए। उसे मशीनों के जरिए करने पर जोर देना चाहिए और बाकी के अन्य कम जरूरी कार्यों को किस तरह से वर्चुअल असिस्टेंट से करवाना चाहिए। यह कॉन्सेप्ट शुरुआत में सबसे पहले पश्चिमी देशों में देखा गया। यही से आउटसोर्सिंग का कल्चर सामनेआया। खासतौर से अमेरिका इस मामले में एक बहुत बड़े बिजनेस मार्केट के रूप में उभरकर सामने आया।

ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन ने भी पेरिस के इस आइडिया को हाथों हाथ अपनाया। एक सर्वे के अनुसार, अमेरिका में तो करीब 43 प्रतिशत लोग कभी-न-कभी कुछ समय के लिए रिमोट वर्किंग कर चुके हैं। सर्वे की मानें, तो 2020 तक वहां के 50 फीसद से अधिक प्रोफेशनल्स की तादाद ऐसी हो जाएगी, जो घर बैठकर ही काम करना चाहेंग। ऐसे में धीरे-धीर ही सही अपने देश में भी रिमोट वर्कफोर्स और वर्क टू होम का यह कल्चर देखने में आ रहा है। कई कॉरपोरेट कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को इस तरह की सहूलियतें उपलब्ध करना शुरू भी कर दिया है।

कौन हैं वर्चुअल असिस्टेंट

वर्चुअल असिस्टेंट का मतलब उन लोगों से है, जो कहीं दूर बैठकर एक एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट की तरह आपके प्रशासनिक और निजी, सारे काम संभालते हैं यानी ऐसे प्रोफेशनल, जो रोजाना ऑफिस में बैठकर 9 से 5 की जॉब नहीं करते, बल्कि कहीं किसी सुदूर जगह से अपना काम करते हैं। इन्हें ही आजकल वर्चुअल एम्प्लॉयी भी कहा जाता है। ये एम्प्लॉयी भी उतने ही स्किल्ड और टैलेंटेड हैं, जितने किआम प्रोफेशनल्स। बस फर्क यही है कि ये ऑफिस के बाहर रहकर काम करते हैं

ऐसे करें शुरुआत

आज की तारीख में आपको गूगल पर तमाम ऐसी साइट्‌स मिल जाएंगी, जहां से अपनी रुचि के अनुसार फ्रीलांस किया जा सकता है। ये साइट्‌स हर काम के लिए फ्रीलांसर्स को घंटे के अनुसार पेमेंट करती हैं। कंपनियों को भी साइट्‌स से काफी सहूलियतें मिल रही हैं, क्योंकि उन्हें वर्चुअल असिस्टेंट सर्विसेज के लिए यहां से फ्रीलांसर्स मिल जाते हैं। विशअपडॉट भी ऐसी ही एक साइट है, जो कंपनियो/एंटरप्रेन्योर्स को उनके जरूरत के अनुसार वर्चुअल असिस्टेंट/ आ फ्रीलांसर्स उपलब्ध कराती है।