पुणे के रहने वाले 18 साल के तनिष्क ने हाल ही में सीए की इंटरमीडिएट परीक्षा में ऑल इंडिया टॉप किया है। खास बात यह है कि उन्होंने पहली बार यह परीक्षा दी और पहला स्थान हासिल किया! उन्हें 700 में से 533 अंक मिले। पिछले साल ही उन्होंने 85 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं पास की थी। यह सब बताने से ज्यादा जरूरी तनिष्क की बातें बताना है, जो हर किसी के लिए प्रेरक हो सकती हैं। तनिष्क कहते हैं, 'मेरी पहली पसंद है पढ़ना। इसके अलावा फुटबॉल खेलना मेरा शौक है। घूमना और फिल्में देखना भी मेरी फेवरिट लिस्ट में हैं।" सीए एग्जाम टॉप करने के बारे में वे बताते हैं कि यह फील्ड उन्हें पसंद है, हालांकि इसके लिए उन्होंने न तो कोई प्लानिंग की और न ही रणनीति बनाई। बस, जमकर पढ़ाई की। घड़ी देखकर घंटों के हिसाब से नहीं, जब मन होता था, तभी वे पढ़ाई करते थे!

परफॉर्मेंस की राह

तनिष्क की सच्ची कहानी से कई तरह के संदेश निकलते हैं। सबसे पहले तो यह कि अपनी पसंद की फील्ड मिलने पर ही उसे एंजॉय किया जा सकता है और एंजॉय करने पर ही उसमें जोरदार परफॉर्म किया जा सकता है। आम तौर पर विद्यार्थियों के साथ दिक्कत यह होती है कि वे अपनी पसंद को ही पहचान नहीं पाते। यही कारण है कि अपने मन की राह पर चलने के बजाए वे दूसरों का अनुकरण करने लगते हैं, वह उनकी पसंद हो या न हो। इसका नतीजा यह होता है कि वे या तो असफल साबित होते हैं या फिर औसत होकर रह जाते हैं।

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पहचानें प्रतिभा

आमतौर पर 11वीं-12वीं तक आते-आते विद्यार्थी का रुझान स्पष्ट होने लगता है। अगर आपके माता-पिता, घर के बड़े या टीचर इस बारे में आपका मार्गदर्शन करते हैं, तो बहुत अच्छी अन्यथा आपको खुद पहल करनी होगी। दूसरों की तरफ देखने के बजाए अपने मन की बात सुननी-समझनी होगी। हो सकता है कि इसमें थोड़ा समय

लगे लेकिन आप धैर्य रखकर अपनी पसंद समझने का प्रयास करें। ऐसा करना इसलिए जरूरी है क्योंकि आपकी यह पसंद ही आगे चलकर आपके चमकदार करियर की मजबूत नींव बनेगी।

बड़ों का लें साथ

हो सकता है कि आपका मन पेंटिंग या ड्रॉइंग में ज्यादा लगता हो लेकिन आपके पैरेंट्स आपको इंजीनियरिंग या मेडिकल की पढ़ाई कराना चाहते हों। ऐसे में डर या लिहाज में उनकी हां में हां मिलाने और उनकी बात मान लेने के बजाए उनके सामने अपनी बात रखें। उन्हें प्रेमपूर्वक समझाएंगे, तो वे जरूर आपका साथ देंगे। आखिर वे भी तो आपका भला ही चाहते हैं।

पैशन को बढ़ाएं आगे

एक बार अच्छी तरह से अपनी पसंद समझ लेने के बाद यह देखें कि कैसे उस दिशा में जरूरी कोर्स करके आप खुद को आगे बढ़ा सकते हैं। अगर पैरेंट्स सक्षम हैं, तो ठीक है, नहीं तो स्कॉलरशिप, लोन, पार्टटाइम जॉब, ट्यूशन

आदि की मदद से जरूरी कोर्स करने का प्रयास करें। अगर आर्थिक जरूरतों की वजह से नौकरी करने की मजबूरी हो, तो भी ओपन स्कूल या पार्टटाइम के जरिए पढ़ाई करते हुए अपनी योग्यता अवश्य बढ़ाएं ताकि आगे इसका फायदा उठाते हुए उपयुक्त जॉब हासिल कर सकें।

सदा रहें अपडेट

नौकरी मिल जाने के बाद भी निश्चिंत होकर न बैठ जाएं, बल्कि संबंध‍ित इंडस्ट्री की जरूरतों के मुताबिक खुद को अपडेट करते रहें। काम को एंजॉय करें। इस दिशा में वरिष्ठों का सहयोग लेने के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की मदद से भी खुद को आगे बढ़ा सकते हैं। इससे आप संस्थान के लिए मूल्यवान एसेट साबित होंगे।

- अरुण श्रीवास्तव