पेट से निकलने वाला एसिड जब गले तक आ जाता है तो पेट और सीने में जलन, खट्टापन महसूस होता है।बदहजमी या अपच में भी इस प्रकार के लक्षण होते हैं। बीड़ी-सिगरेट पीने वालों को अन्य लोगों की तुलना में रात में गरिष्ठ भोजन करने से अम्लपित्त (एसिडिटी), शुगर, हृदय रोग और खांसी, दमा अधिक होता है। पान, गुटखा, तम्बाकू खाने वालों की लार में 'अल्कली बाई कार्बोनेट' तम्बाकू सेवन से कम बनता है यह भी एसिडिटी होने का एक कारण होता है इसलिए स्वस्थ रहने के लिए तम्बाकू का सेवन नहीं करें। यह बुरी आदत भी है।

एसिडिटी से बचने के उपाय :

भोजन में क्षार और अम्ल पैदा करने वाली वस्तुओं को ठीक-ठीक अनुपात में लेने से एसिडिटी को काफी हद तक रोका जा सकती है। कुछ विशेष फल सब्जियां ऐसे होते हैं जिनके खाने से रक्त की क्षारीयता बरकरार रहती है, जबकि कुछ ऐसे भी खाद्य हैं जिनको खाने पर एसिड पैदा होते हैं तथा जो रक्त की क्षारीयता को कम करते हैं। सभी गूदेदार खाद्य पदार्थ ज्यादा अम्ल पैदा करते हैं, जो काफी हद तक रक्त की क्षारीयता को कम करते हैं, यहां तक कि अंडे भी इसी प्रकार के प्रभाव डालते हैं। हां, इनका प्रभाव मांस की अपेक्षा कम होता है। हर तरह के अनाज तथा रोटियां भी एसिड पैदा करती हैं; किंतु इनके द्वारा पैदा एसिड मांस की अपेक्षा कम होता है। हर तरह के फल, बेर, पत्ती और जड़वाली सब्जियों को छोड़कर अधिक एसिड वाले पदार्थ कहे जाते हैं और ये रक्त एवं अन्य ऊतकीय

द्रवों को क्षारीय बनाने में मदद करते हैं।

इस प्रकार हमारे प्रतिदिन के भोजन में 80 प्रतिशत क्षार पैदा करने वाले रसदार फल, सब्जी, दाल, पके फल, पत्ती तथा जड़वाली सब्जियां और 20 प्रतिशत एसिड पैदा करने वाले फल, जिनमें प्रोटीन मौजूद हों-मांस, मछली, रोटियां इत्यादि भोजन में शामिल होनी चाहिए। इस अनुपात में भोजन करने से एसिड संतुलित रहेगा, जिससे स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। संतरे के आधे लीटर रस में आठ ग्राम पोटैशियम, जिसमें एसिड की मात्रा अधिक होती है, पाया जाता है।

अम्लता के दौरान नाश्ते में ताजे फल, दोपहर के खाने में अम्लयुक्त कच्ची सब्जियां और कम एसिड फल तथा रात के भोजन में कच्ची एवं पकी हरी सब्जियों, जैसे 'चुकंदर, गाजर, फूलगोभी' इत्यादि खानी चाहिए। सात दिनों के बाद इस आहार के साथ मीठे फल भी लिए जा सकते हैं।

एसिडिटी से मुक्ति देते ये फल

- दो चम्मच आंवले के रस में इतनी ही मिश्री मिलाकर पिएं या बारीक सूखा पिसा हुआ आंवला और मिश्री समान मात्रा में मिलाकर पानी से फांक लें।

- आलू की प्रकृति क्षारीय है। इसमें पोटेशियम साल्ट होता है जो एसिडिटी को कम करता है। अम्लता के रोगी भोजन में नियमित आलू खाकर अम्लता को दूर कर सकते हैं। आलू सेंका हुआ या उबला हुआ ही लें।

- चाय एसिडिटी के रोगी के लिए हानिकारक है। इसका सेवन ना करें।

- गाजर का रस एसिडिटी ठीक कर देता है।

- सुबह-शाम भोजन के बाद 1-1 लौंग खाने से लाभ होता है।

- गर्मी के प्रभाव से खट्टी डकारें आती हों तो मूली के रस में मिश्री मिलाकर पीने से लाभ होता है।

- खाने के बाद दो पीस पेठा खाने से एसिडिटी ठीक हो जाती है।