फिट रहने के लिए अब लोग सजगता से कई सारे तरीकों को अपनाते हैं। इनमें से कुछ ज्यादा लाभदायक हो सकते हैं, कुछ कम। कार्डियोवेस्क्युलर वर्कआउट में ट्रेडमिल व इलिप्टिकल ट्रेनर का खास महत्व है। इलिप्टिकल ट्रेनर

एक्स ट्रेनर और क्रॉस ट्रेनर के नाम से भी जानी जाने वाली यह मशीन लगभग साइकल की तरह ही होती है जो सीढ़ियां चढ़ने, चलने और दौड़ने जैसी कसरतें करवाने का साधन होती है, वह भी जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना। यह मुख्यतः दो प्रकार के स्वरूप में होती है- पीछे सीट के साथ तथा बीच में सीट के साथ। यदि कोई व्यक्ति बाहर जाकर नियमित व्यायाम नहीं कर पाता है, तो वह इलिप्टिकल ट्रेनर से फिट रह सकता है।

ट्रेडमिल

जिम में जाने के अलावा अब लोग निजी तौर पर भी ट्रेडमिल का उपयोग करने लगे हैं। मगर अक्सर इसे बिना सलाह, अपनी मर्जी से उपयोग में लाया जाता है जिसकी वजह से कई बार गंभीर हादसे भी हो जाते हैं। यह मशीनएक ही जगह पर खड़े रहकर दौड़ने या चलने जैसी एक्सरसाइज करवाने का साधन बनती है।

क्या है ज्यादा फायदेमंद?

ये दोनों ही मशीनें कार्डियोवेस्क्यूलर वर्कआउट के लिहाज से अच्छी मानी जाती हैं। ये दोनों ही एरोबिक वर्कआउट

का लाभ देती हैं। ट्रेडमिल व इलिप्टिकल ट्रेनर में तुलना करने पर ज्यादातर विशेषज्ञ इलिप्टिकल ट्रेनर को ज्यादा फायदेमंद बताते हैं। इसके पीछे कई कारण हैं, जैसे ह यह पाया गया है कि इलिप्टिकल ट्रेनर, ट्रेडमिल की तुलना में कूल्हों, घुटनों और कमर पर कम दबाव डालता है, जबकि ट्रेडमिल पर तेज चलने और इलिप्टिकल पर वर्कआउट करने में फोर्स समान लगता है। ऐसे में जोड़ों पर ज्यादा दबाव डाले बिना लगभग एक जैसे वर्कआउट का लाभ लिया जा सकता है।

- ट्रेडमिल पर एक जैसी स्थिति में चलने या दौड़ने के बजाए ज्यादातर इलिप्टिकल ट्रेनर पर मौजूद हैंडल्स के कारण इस पर एक साथ हाथ और पैर दोनों की एक्सरसाइज की जा सकती है, जोकि ट्रेडमिल पर संभव नहीं हो पाती।

- अधिकतर इलिप्टिकल मशीन्स में पैडल्स को रिवर्स चलाने की सुविधा भी होती है, जिससे पिंडली और घुटनों के

पीछे की नस की भी कसरत ज्यादा होती है और यह पैरों की सेहत के लिहाज से अच्छा होता है।

- अगर आप सही तरीके से इलिप्टिकल ट्रेनर का उपयोग कर रहे हैं, तो ज्यादा लाभ उठा पाएंगे। इसके लिए अपने

कंधों को पीछे की ओर रखें, न कि आगे झुकाएं। साथ ही, पेट की मसल्स को टाइट रखें और सिर को सामने की तरफ ऊंचा करके रखें।