मल्टीमीडिया डेस्क। मुंबई के एलफिंस्टन रोड स्टेशन पर शुक्रवार को हुए हादसे में 22 लोगों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि रेलवे ने कैग के द्वारा दी गई चेतावनी को नजरअंदाज करके बड़ी लापरवाही बरती है।

जबकि इस घटना के पहले से ही इस पुल तथा रेलवे के कार्य प्रणाली पर लोग तमाम सवाल उठाते रहे हैं। शुक्रवार को भी स्टेशन की पुल पर मची भगदड़ की जांच के बाद चाहें जो भी कारण सामने आयें लेकिन कहीं न कहीं यह रेलवे के कार्य प्रणाली पर प्रश्न जरुर खड़ा कर रहा है।

इस बड़ी त्रासदी पर प्राप्त हुए दस्तावेजों के अनुसार अब यह बात सामने आई है कि 12 करोड़ के पुल का नवीनीकरण करने के लिए केवल 1000 रुपए आवंटित किये गये थे। जिसे तत्कालीन रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने मंजूरी दी थी। पश्चिम रेलवे के बजटीय बही ( पिंक बुक) एक रेलवे का एक आधिकारिक दस्तावेज है जिसमें संबंधित परियोजनाओं के लिए मंजूर राशि और आवंटन की सूची होती है।

इस किताब के पॉइंट संख्या 673 एलफिंस्टन रोड फुटओवर ब्रिज से संबंधित है। जिसका औपचारिक रुप से प्रभादेवी रेलवे स्टेशन नामित किया गया है। 2016-17 में इस पुल के लिए 1000 रुपये आवंटित राशि के रुप में वर्णित है जबकि कुल स्वीकृत लागत 12 करोड़ रुपये थी। इसके लिए चालू वित्त वर्ष के लिए 35 लाख रुपए बढ़ाया गया था।

रेल मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि यह राशि मात्र प्रतिनित्व करने वाली राशि है। एक बार परियोजना के प्रारंभ हो जाने पर बजट को आवंटित कर दिया जाता है। यह राशि इसलिए प्रतिनिधित्व करने वाला है क्योंकि इस कार्य के संबंध में विस्तृत अनुमान अभी तक स्वीकृत नहीं किये गये थे। इसके लिए निविदा 9 नवंबर को जारी होना भी एक कारण है। लेकिन रेलवे को करीब से जानने वाले विशेषज्ञों ने इसका खंडन किया है।

कोई भी कार्य तब तक नहीं हो सकता जबतक उसके लिए राशि स्वीकृत न हो। टेंडर को जारी करने के पहले उसकी योजना बनाने, अनुमानित लागत की जानकारी, निविदा के लिए आमंत्रण को तैयार करने का कार्य आदि सम्मिलित होते हैं।

घटना के शुरु होने को लेकर पुलिस सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है। इसके अलावा लोगों द्वारा लिये गये वीडियो क्लिपों की भी जांच की जा रही है जिससे सच्चाई सामने आ सके।