मुंबई। यदि कोई डॉक्टर बलात्कार और एसिड अटैक के शिकार लोगों को फौरन प्राथमिक उपचार देने से इनकार करता है तो उस खिलाफ एफआईआर दर्ज हो जाएगी। यह बात राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार को जारी एक दिशा-निर्देश में कही है।

विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देश के अनुसार, कोई भी डॉक्टर या चिकित्सक, बलात्कार और एसिड अटैर के शिकार लोगों के इलाज से इनकार नहीं कर सकता। मरीज को फौरन और मुफ्त इलाज की सुविधा न देने पर संबंधित डॉक्टर या अस्पताल के खिलाफ आईपीसी की धारा 166 ( B) के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी। केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देशों के आधार पर राज्य सरकार ने भी इससे जुड़ा परिपत्र जारी किया है।

डॉक्टर्स को नाबालिगों से बलात्कार और पाक्सो कानून के तहत आने वाले मामलों में भी इलाज के लिए जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। निजी और सरकारी दोनों अस्पतालों को इन दिशा-निर्देशों के पालन की हिदायत दी गई है। दिशा-निर्देश के अनुसार डॉक्टर्स को ऐसे मरीजों को फौरन अटेंड करना होगा और उन्हें मुफ्त इलाज देना होगा। निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, नियमों के तहत जांच के लिए 12 साल या उससे ज्यादा उम्र के व्यक्ति से ही सहमति ली जा सकती है। बलात्कार और एसिड अटैक के पीड़ितों का बिना देरी के जांच कर रिपोर्ट तैयार करना अनिवार्य है।

राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देश में फौरन और मुफ्त इलाज देने के साथ ही साथ अन्य कई प्वाइंट शामिल है। इसके तहत डॉक्टर्स को जांच के लिए सहमति प्राप्त करना, इतिहास की जानकारी लेना, चिकित्सा जांच करना, न्यायिक प्रक्रिया में इस्तेमाल के लिए नमूने सुरक्षित रखना, पुलिस को मामले की जानकारी देना साथ ही चिकित्सकीय सुविधा के साथ मानसिक और सामाजिक सहायता भी उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।