पुणे। स्कूली किताबों में सालों से कुछ तस्वीरें ऐसी हैं जो कभी बदली नहीं दिखाई दी। आपने भी अपने छात्र जीवन में अपनी किताबों में किचन में सब्जी काटती मां और अखबार पढ़ते पिता की तस्वीरों को देखा होगा। लेकिन अब ये पारंपरिक तस्वीरें महाराष्ट्र की स्कूली किताबों में नजर नहीं आएंगी। अधिकारियों के मुताबिक सामजिक ढांचे में बदलाव के साथ ही राज्य पाठ्यक्रम बोर्ड बाल भारती ने भी अपनी किताबों में कई बदलाव कर दिए हैं। इसका मकसद लैंगिक रुढिवादिता को तोड़ना है।

बाल भारती से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि बाल भारती लैंगिक रुढिवादिता को तोड़ना चाहता है, यही वजह है कि कक्षा दो कि किताबों में कहानी और तस्वीरों में महिला और पुरुष दोनों ही घरेलू कामों को साझा कर रहे हैं।

एक तस्वीर में एक महिला और पुरुष दोनों सब्जी धोते दिखाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी में वह साथ बैठे नजर आ रहे हैं। एक तस्वीर में महिला को डॉक्टर के तौर पर दिखाया गया है तो वहीं उसी तस्वीर में पुरुष को ट्रैफिक पुलिस बताते हुए ट्रैफिक मैनेज करते दिखाया गया है।

बाल भारती के डायरेक्टर सुनील मगर का कहना है कि पाठ्य पुस्तकों में इस बदलाव का मकसद छात्रों को ये बताना है कि महिला और पुरुष दोनों बराबर का दर्जा रखते हैं। दोनों कोई भी काम कर सकते हैं।

वहीं दूसरी ओर शिक्षक जगत ने पाठ्यपुस्तक में किए गए इस बदलाव का स्वागत किया है जो लैंगिक समानता पर जोर दे रही है।