मुंबई। अपने तरह के एक बेहद ही अजीबोगरीब मामले में मुंबई को कोर्ट ने एक महिला को उस पति के दूसरे बच्चों को जन्म देने की अनुमति दे दी है जिससे उसका तलाक होने वाला है। महिला ने कोर्ट में अर्जी दाखिल कर मांग की थी कि इससे पहले कि उसकी मां बनने की उम्र गुजर जाए, वो अपने तलाक ले रहे पति के दूसरे बच्चे की मां बनना चाहती है। इसके लिए कोर्ट ने आईवीएफ की मदद लेने के निर्देश दिए हैं।

जानकारी के अनुसार मुंबई की एक फैमिली कोर्ट के सामने महिला ने अर्जी दाखिल कर मांग की थी कि वो अपनी मां बनने की उम्र खत्म होने से पहले दूसरा बच्च पैद करना चाहती है। इसके लिए वो अपने उस पति से बच्चा चाहती है जिससे तलाक का केस कोर्ट में चल रहा है। कोर्ट ने उसकी अर्जी को अंतरराष्ट्रीय कानूनों और प्रजनन के अधिकार को एक शख्स के आधारभूत नागरिक अधिकार मानते हुए जल्द से जल्द मैरिज काउंसलर से मिलने और अगले एक महीने में आईवीएफ के लिए अपॉइंटमेंट लेने के लिए कहा है।

हालांकि, पति ने इस अर्जी का विरोध किया और इसे सामाजिक नियमों के खिलाफ करार दिया। हालांकि, कानून के अनुसार कोर्ट ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए दोनों को डॉक्टरी सलाह लेने के निर्देश दिए हैं। डॉक्टर्स से मिलने के बाद डॉक्टर्स को दोनों के माता-पिता बनने की संभावनाओं को लेकर एक गुप्त रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश करनी होगी।

एक अंग्रेजी अखबार की खबर के अनुसार, मुंबई के रहने वाले पति ने 2017 में पत्नी द्वारा प्रतिड़ित किए जाने के आधार पर कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की थी। महिला ने भी तलाक की अर्जी दी थी। जिस वक्त कोर्ट में तलाक को लेकर सुनवाई चल रही थी तभी महिला ने नांदेड़ की फैमिली कोर्ट में अर्जी दाखिल कर अपने तालक ले रहे पति के दूसरे बच्चे की मां बनने की इच्छा जाहिर की।

महिला के वकील शिवराज पाटिल के अनुसार उनकी मुवक्किल 35 साल की हैं और चाहती हैं कि उनका एक और बच्चा हो जो भविष्य में अपने भाई-बहन को मदद कर सके। हालांकि, महिला के पति ने इससे इनकार किया और इसे गलत करार दिया। उनके वकील के अनुसार उनका मुलक्किल अपनी पत्नी से दूसरा बच्चा नहीं चाहता और कोई भी उन्हें संबंध बनाकर या दूसरे किसी माध्यम से बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।

इसके बाद कोर्ट ने माना कि तलाक की प्रक्रिया जारी है और ऐसे में आपसी संबंध बनाकर बच्चा पैदा करने की अनुमति नहीं दी सकती लेकिन आईवीएफ के माध्यम से यह संभव है। यह किसी कानून का उल्लंघन नहीं करता।