मुंबई। केंद्र और महाराष्ट्र की सत्ता में सहयोगी होने के बावजूद भाजपा और शिवसेना के बीच पटरी नहीं बैठ पा रही है। शिवसेना ने रविवार को आयोजित हो रहे अपने स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल होने का भाजपा को न्योता नहीं दिया है।

इसको लेकर विपक्षी कांग्रेस और राकांपा ने राजग पर निशाना साधा है। शिवसेना की प्रवक्ता मनीषा कायंदे ने बताया कि आंतरिक कार्यक्रम होने के चलते हमने भाजपा को निमंत्रित नहीं किया। भाजपा ने भी इलाहाबाद में संपन्न अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में राजग के किसी भी घटक दल को न्योता नहीं दिया था।

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हर दल का अपना कार्यक्रम होता है, जो केवल उसके सदस्यों के लिए होता है। इस पर भाजपा प्रवक्ता माधव भंडारी ने कहा, "यह उनका अपना कार्यक्रम है। लिहाजा यह उनके ऊपर निर्भर करता है कि वे किसको बुलाते हैं और किसे नहीं।"

वहीं कांग्रेस और राकांपा ने इसको लेकर राजग पर चुटकी ली है। कांग्रेस प्रवक्ता अल नसीर जकरिया के अनुसार, "महाराष्ट्र की सत्ता में शामिल दोनों दल आपस में हमेशा लड़ते रहते हैं। नाटकबाजी छोड़ कर शिवसेना अगर विपक्ष में शामिल होती है तो उसका स्वागत है।"

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राकांपा विधायक किरण पवास्कर ने कहा, "भारी भ्रष्टाचार के कारण भाजपा और शिवसेना दोनों के बीएमसी चुनाव जीतने की संभावना नगण्य है। इसलिए मतदाताओं को बरगलाने के लिए दोनों एक-दूसरे पर दोषारोपण करते रहते हैं।" शिवसेना अपने 50वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर गोरेगांव ईस्ट एनएसई ग्राउंड में बड़ी रैली आयोजित करने जा रही है।