मुंबई। 60 साल की महिला के साथ लगभग 23 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने के मामले में गोरेगांव पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जहां एक शख्स ने खुद को प्रतिष्ठित बैंक का प्रतिनिधि बताया और उसने फर्जी मेडिक्लेम पॉलिसिज बेचकर 3.7 लाख रुपए की धोखाधड़ी की, वहीं एक महिला ने खुद को भारत के बीमा नियामक निकाय के एक कर्मचारी के रूप में पेश कर 19.23 लाख का चूना लगा दिया।

धोखाधड़ी की शिकार हुई यह महिला सरकार द्वारा संचालित एक पेट्रोलियम कंपनी में सीनियर असिस्टेंट मैनेजर के रूप में काम करती है। उसके माता-पिता की उम्र लगभग अस्सी साल है और बीमारी की वजह से बिस्तर पर ही हैं। उस समय जब उनका अप्रैल 2016 में विकास चव्हाण नाम के व्यक्ति से संपर्क हुआ तब वह महिला अपने बुजुर्ग माता-पिता के खर्चों के लिए मेडिक्लेम पॉलिसी की तलाश में थीं।

पुलिस में अपनी शिकायत दर्ज कराते हुए महिला ने कहा कि चव्हाण ने उसे एक पॉलिसी बेची जिसके लिए उसने तीन किश्तों में 2.79 लाख रुपए का भुगतान किया। उसने अक्टूबर 2016 में फिर से 97,215 रुपए की पॉलिसी बेची और उसे बताया कि वह एक साल में लाभ उठा सकती है।

हालांकि, चव्हाण को सभी पेमेंट किए जाने के बाद उसने कॉल को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया। इसके बाद महिला को शक हुआ तो उसने सभी डॉक्यूमेंट्स की जांच की। फिर उसे पता चला कि उसने अपनी पेंशन पॉलिसी बेची है, न कि मेडिक्लेम पॉलिसी को।

महिला के मुताबिक, 'जब एक बार चव्हाण ने फोन उठाया तो मैंने उससे पूछा कि उसका साथ धोखा क्यों किया तो उसने कहा कि मैंने कंपनी छोड़ दी है और अब देविका नाम की महिला उसकी पॉलिसी मैनेज कर रही है।'

देविका ने दिसंबर 2016 को उसे कॉल किया और कहा कि वह इंश्योरेंस रेग्यूलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया में काम करती है और वह चव्हाण द्वारा किए गए घपले की जांच कर रही है। देविका ने इन्वेस्टिगेशन फीस और प्रीमियम के रूप में 19.23 लाख रुपए मांगे। उसके बाद महिला ने एक दोस्त की सलाह पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

गोरेगांव पुलिस स्टेशन के एक ऑफिसर ने कहा, 'हमने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ आईपीसी 120बी, 170, 419, 420, 464, 465 और 34 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।'