मुंबई। अपने पति के लिवर का इलाज के लिए पैसा जुटाने की उम्मीद से सांताक्रूज की रहने वाली कोकिला पटेल ने सलमान खान के चेरिटेबल ट्रस्ट बीइंग ह्यूमन फाउंडेशन का ईमेल आईडी इंटनेट पर तलाशा, लेकिन उसे नहीं पता था कि वह एक जाल में फंस रही है। उसने जो आईडी ऑनलाइन तलाशा वह फर्जी था और सलमान खान के चैरिटेबल ट्रस्ट का प्रतिनिधि बनकर महिला को ही 30 हजार से ज्यादा का चूना लगा दिया।

कोकिला के पति को लिवर सिरोसिस दो साल पहले डायग्नोज हुआ और तब से उनका अंधेरी हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। उनकी दवाइयों का खर्चा ही 80 हजार रुपए महीना है। कोकिला के मुताबिक उसके पति गोआ में होटल चलाते थे लेकिन बीमार होने के बाद उन्हें वह छोड़ना पड़ा।

कोकिला ने राजस्थान के सिरोही में टीचिंग जॉब ले लिया लेकिन 30 हजार रुपए महीने की कमाई से उनके इलाज का आधा खर्चा भी कवर नहीं हो रहा था। वे कहती हैं, 'मैं सिरोही और मुंबई के बीच ट्रेवल करती रही। एक ट्रिप के दौरान मैंने बीइंग ह्यूमन फाउंडेशन के अच्छे काम के बारे में सुना और उनसे संपर्क करने का फैसला किया।'

पिछले महीने, कोकिला ने एक सर्च इंजन से ईमेल आईडी निकाला beingsalmankhan@socialworker.net। उसे लगा कि यह सलमान के ट्रस्ट का ईमेल आईडी है जो कि वास्तव में फर्जी था। उसने मेल लिखा और मदद की गुहार लगाई। उसे जवाब मिला कि उनके लिए 7 लाख का फंड अप्रूव किया गया है।

कोकिला के मुताबिक, 'इस फंड के बारे में सुनकर मैं खुश थी। इससे कई समस्याओं का हल हो सकता था। मेरे पति का प्रॉपर ट्रीटमेंट हो सकता था।'

लेकिन तुंरत ही इसके बाद उन्हें एक और फर्जी मेल मिला जिसमें प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 14 हजार रुपए जमा करने को कहा गया। उसने कहा, 'मुझे पेमेंट करने और रसीद की कॉपी मेल करने को कहा गया।'

फंड पाने का यह मौका छूट न जाए, इसलिए कोकिला ने तुरंत पेमेंट कर दिया। लेकिन धोखधड़ी की तो बस ये शुरुआत थी। उसे उसके बाद 9,600 रुपए फंड क्लीयरेंस चार्ज के रूप में भरने को कहा गया। कोकिला ने कहा, 'उन्होंने कहा तो मैंने इसका भी भुगतान कर दिया। उन्होंने कहा था कि इस पेमेंट के आधे घंटे बाद फंड मेरे बैंक अकाउंट में आ जाएगा। उन्होंने ऐसा जताया जैसे कि सिर्फ इसके कारण फंड ट्रांसफर में देरी हो रही है।'

कोकिला ने कहा मैं पेमेंट तो नहीं कर पाई लेकिन मैंने पैसों की व्यवस्था कर ली थी लेकिन धोखाधड़ी यहां भी नहीं रूकी और उन्होंने 14000 रुपए की फिर डिमांड की। कोकिला ने कहा, 'इस समय मैंने आपत्ति जताई। मैंने उनसे पूछा कि कैसे वे मुझसे पैसों की मांग कर सकते हैं, जबकि मैं खुद पैसों की मदद के लिए उनके पास आई।'

आखिरकार जब कोकिला को संदेह हुआ तो अल्पसंख्यक समुदाय के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. अब्राहम मथाई संपर्क किया। डॉ. मथाई ने उसे बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क करने की सलाह दी। 6 अप्रैल को कोकिला ने साइबर क्राइम सेल को लिखा।

बीइंग ह्यूमन के प्रवक्ता ने कहा कि उनकी संस्था के नाम पर ऐसे मामले पहले भी हो चुके हैं। जब सभी जरूरी जानकारियां हमारे साथ शेयर होती हैं, तो हम कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हैं। हमारी वेबसाइट www.beinghumanonline.com है और सभी सोशल मीडिया हैंडल्स और सही संपर्क सूत्र वहीं उपलब्ध है। हम प्रोसेसिंग फीस या टैक्स पेमेंट्स के नाम पर लोगों से चार्ज नहीं करते हैं।