मुंबई। जिंदगी की चकाचौंध और आराम छोड़कर महाराष्ट्र के भिवंडी में रहने वाले एक बिजनेसमैन के पूरे परिवार ने वैराग्य ले लिया है। सांसारिक सुखों को त्याग कर इस परिवार के चार सदस्यों ने धर्म का रास्ता चुन लिया है। महाराष्ट्र में रहने वाले इस परिवार ने 11 जनवरी को गुजरात के संखेश्वर में जैन धर्म की दीक्षा ली। इससे पहले परिवार ने भिवंडी के गोकुलनगर में गाजे-बाजे के साथ वैराग्य का उत्सव मनाया।

राकेश कोठारी (45) महाराष्ट्र के जाने-माने टेक्सटाइल व्यापारी हैं। राकेश कोठारी ने पत्नी सीमा कोठारी (43), बेटे मीत कोठारी (21) और बेटी शैली कोठारी (19) के साथ वैराग्य अपना लिया है। कोठारी का बेटा मीत हिंदुजा कॉलेज से बीकॉम करने के बाद सीए का कोर्स कर रहे थे। वहीं, बेटी शैली एचएससी के बाद धार्मिक शिक्षा ले रही थीं। कोठारी ने वैराग्य से पहले बताया था कि, बेटी को गाने का बहुत शौक था और वह इंडियन आयडल में जाना चाहती थीं। लेकिन, अब पूरा परिवार एक साथ धर्म की राह पर चल पड़ा है। परिवार के चारों सदस्यों के दीक्षा लेने के बाद उनका कारोबार देखने वाला कोई नहीं बचा।

कोठारी परिवार के चारों सदस्यों ने दीक्षा लेकर जैन धर्म के अनुसार संयमित जीवन जीने का फैसला किया है। उन्होंने पारंपरिक तरीके से बैंड-बाजे के साथ अपने वैराग्य का उत्सव मनाया, जिसमें भारी संख्या में जैन समाज के लोग शामिल हुए। गोकुलनगर स्थित वीर संन्यास वाटिका तक प.पू.पं. श्रीजयभूषण विजयजी म.सा. के मार्गदर्शन में गिरनार भावयात्रा के बाद दीक्षा के लिए विरती वंदना कार्यक्रम का आयोजन किया गया।


राकेश कोठारी ने बताया कि, मैंने जैन धर्म को समझा और मुझे लगता है कि शाश्वत सुख साधू जीवन में ही मिल सकता है। मोक्ष की प्राप्ति दीक्षा लेने में ही है। इसीलिए मैंने दीक्षा लेने का निर्णय लिया। संसार में दुखों को कम करने के लिए मेरे साथ-साथ मेरे परिवार ने भी वैराग्य धारण किया है।