पणजी। मनोहर पर्रीकर की बीमारी के चलते गोवा की सियासत में पहले से ही उथल-पुथल चल रही थी। कांग्र्रेस ने राज्यपाल को पत्र लिखकर सरकार बनाने का दावा भी किया था।

अब जब पर्रीकर नहीं रहे, नए सीएम की तलाश के साथ ही सियासी घमासान के तेज होने की संभावना भी बढ़ गई है। गोवा विधानसभा के लिए 2017 में हुए चुनाव में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला था।

तब केंद्र में रक्षा मंत्री रहे पर्रीकर ने गोवा फॉरवर्ड पार्टी, महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाई थी।

वह पणजी से विधायक चुने गए थे। लोकसभा चुनाव के साथ ही गोवा की तीन विधानसभा सीटों शिरोदा, मंडरेम और मपूसा के लिए भी 23 अप्रैल को मतदान होना है।

अब जब मुख्यमंत्री पर्रीकर का निधन हो गया है, भाजपा को नया नेता चुनकर राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश करना पड़ेगा। उसे विधायकों के समर्थन का पत्र भी सौंपना पड़ेगा।

अगर राज्यपाल मृदुला सिन्हा समर्थन को लेकर आश्वस्त नहीं होती हैं तो वह विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी कांग्र्रेस को सरकार बनाने का न्योता दे सकती हैं।

सरकार ने पहले ही राज्यपाल को पत्र लिखकर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। कांग्रेस ने दावा किया है कि विधानसभा में बीजेपी के पास बहुमत नहीं है और कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका दिया जाना चाहिए।

राज्यपाल को लिखे पत्र में कांग्रेस ने यह भी लिखा है कि गोवा में राष्ट्रपति शासन लागू करने की कोई भी कोशिश गैर-कानूनी होगी और कांग्रेस उसे कोर्ट में चुनौती देगी।

गोवा विधानसभा की स्थिति

-कुल सदस्य-36(40) -कांग्र्रेस- 14 -भाजपा - 12 -गोवा फॉरवर्ड पार्टी-3 -एमजीपी - 3 - निर्दलीय- 3 -एनसीपी- 1