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    झुग्गी में रहने वाला प्रथमेश बना इसरो में साइंटिस्ट, पढ़ें संघर्ष की प्रेरणादायक कहानी

    Published: Fri, 08 Dec 2017 09:58 AM (IST) | Updated: Fri, 08 Dec 2017 10:04 AM (IST)
    By: Editorial Team
    prathmesh hirvey 08 12 2017

    मुंबई। चुनौतियां सभी की जिंदगी में होती हैं। कुछ उन चुनौतियों के आगे टूट जाते हैं, तो कुछ उनको हराकर अपना मुकाम हासिल करते हैं। ऐसी ही संघर्षों की कहानी है मुंबई की झुग्गी बस्ती फिल्टरपाड़ा में रहने वाले प्रथमेश हिरवे की। वह वे कड़ी मेहनत की बदौलत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की परीक्षा पास करने में सफल हुए हैं।

    अब प्रथमेश इसरो में वैज्ञानिक के तौर पर काम करेंगे। इसके साथ ही वो मुंबई से इसरो पहुंचने वाले पहले शख्स बन गए हैं। 10x 10 के घर में अपने माता-पिता के साथ रहने वाले प्रथमेश ने यह परीक्षा कठिन परिस्थितियों ने पास की। दरअसल, 10 वीं तक मराठी में पढ़ाई करने के कारण उन्हें आगे की पढ़ाई करते समय भाषा की दिक्कत होती थी।

    प्रथमेश बचपन से इंजीनियर बनना चाहते थे। इसीलिए उन्होंने 2007 में भागुभाई मफतलाल पॉलिटेक्निक कॉलेज में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया। जहां उन्हें भाषा की दिक्कत फिर आड़े आ गई। इसके बावजूद उन्होंने यहां डिप्लोमा हासिल किया और आखिरकार उन्हें एलएंडटी कंपनी में इंटर्नशिप मिली।

    यहां उन्हें ऑफिस के लोगों ने आगे पढ़ाई करने की सलाह दी। फिर इंटर्नशिप छोड़ प्रथमेश ने नौकरी करने के बजाय नवी मुंबई के इंदिरा गांधी कॉलेज में बीटेक करने के लिए एडमिशन लिया और 2014 में उनकी बीटेक की पढ़ाई पूरी हो गई।

    फिर नौकरी करने के बजाय प्रथमेश ने यूपीएससी की परीक्षा दी, लेकिन सफल नहीं हो पाए। उन्होंने इसके बाद अपने दूसरे लक्ष्य इसरो की तरफ मेहनत करना शुरू किया। उन्होंने इसरो के लिए भी परीक्षा दी लेकिन इसमें भी सफलता इनके हाथ नहीं लगी। इसके बावजूद प्रथमेश ने हार नहीं मानी और इसरो के लिए तैयारी करते रहे। वो नौकरी से समय निकालकर इसरो के लिए पढ़ाई करते थे।

    इस साल मई में हुई परीक्षा में उन्होंने फिर से कोशिश की। इस परीक्षा में 16,000 उम्मीदवार बैठे थे और केवल 9 का सलेक्शन होना था। 14 नवंबर को जब परीक्षा का रिजल्ट आया, तो प्रथमेश उन 9 खुशनसीब उम्मीदवारों में से थे, जो इसरो में बतौर वैज्ञानिक चुने गए।

    प्रथमेश इसरो में इलेक्ट्रिकल साइंटिस्ट के पद पर होंगे। उन्हें चंडीगढ़ में पोस्टिंग मिली है। प्रथमेश अपनी नई नौकरी से अपने घर वालों को एक अच्छी जिंदगी देना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'मैंने इसरो पहुंचने से पहले 10 साल कड़ी मेहनत की है।'

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