मुंबई। कुछ अच्छा करने की चाह हो, तो रास्ते आपने आप बन जाते हैं। केमिकल इंजीनियर रीमा साठे ने महाराष्ट्र के किसानों की खराब हालत के बारे में एक लेख पढ़ा और कुछ करने की सोचा। इसके साथ ही उन्होंने 'हैप्पी रुट्स' नाम की एक स्टार्ट अप की शुरुआत की।

यह फूड कंपनी स्वस्थ, प्राकृतिक और प्रिजर्वेटिव फ्री नाश्ता बनाती है। इसके लिए महाराष्ट्र में छोटे और आदिवासी किसानों से कच्चा माल सीधे खरीदा जाता है। प्रशिक्षित ग्रामीण महिलाओं के समूहों द्वारा उसे हाथ से बनाकर बाजार में उतारा जाता है।

रीमा साठे एक युवा उत्साही केमिकल इंजीनियर हैं, जो बिजनेस में भी पोस्ट ग्रेजुएट हैं। उन्होंने कृषि स्टार नाम के एक स्टार्ट-अप में करीब एक साल काम किया, जो गुजरात और महाराष्ट्र में छोटे टमाटर किसानों के लिए बाजार बनाने का काम करती थी।

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मगर, वह उससे ज्यादा करना चाहती थीं। ऐसे में उन्होंने महाराष्ट्र में दूरदराज के गांवों का दौरा करने का फैसला किया। वहां जाने के बाद उन्हें लगा कि किसानों को खेती के साथ-साथ यह भी स्थायी व्यवसाय भी करें, तो उनकी मुश्किलें खत्म हो सकती हैं।

जून 2015 में किसानों के वॉट्सऐप ग्रुप के बारे में पढ़ने के बाद उन्होंने अपनी कंपनी 'हैप्पी रुट्स' शुरूआत की। रीमा कहती हैं कि आज हमारे साथ में महाराष्ट्र के 10 हजार किसान जुड़ गए हैं। हम उन्हें सबसे अच्छे बाजार मूल्य मुहैया कराते हैं और वे हमारे लिए सबसे बेहतरीन अनाज के दाने सुरक्षित रखते हैं।

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हर बार जब एक ग्राहक को हैप्पी रुट्स से कोई उत्पाद खरीदता है, तो लाभ का एक हिस्सा वापस समुदाय के प्रशिक्षण और स्थानीय किसानों की क्षमता बढ़ाने में निवेश कर दिया जाता है। इस स्टार्ट-अप के कारण अब तक 2000 से अधिक छोटे किसानों पर सीधा प्रभाव पड़ा है और विदर्भ की 100 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मिला है।