ओमप्रकाश तिवारी, मुंबई। नासिक-त्र्यंबक सिंहस्थ कुंभ में नए महिला अखाड़े को मान्यता दिलाने पर अड़ीं परी अखाड़ा की पीठाधीश्वर जगद्गुरु त्रिकाल भवंता ने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास से खुद को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है।

नासिक में बुधवार को प्रेस को संबोधित करते हुए साध्वी भवंता ने मंगलवार को वहां ध्वजारोहण समारोह के दौरान अपने साथ हुई धक्का-मुक्की के लिए महंत ज्ञानदास को जिम्मेदार ठहराया। साध्वी के अनुसार मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के मंच पर रहते ज्ञानदास के इशारे पर कुछ लोगों ने उनसे धक्का-मुक्की की और माइक छीन लिया। साध्वी कहती हैं, 'उस घटना के बाद से मैं इतनी डर गई हूं कि मुझ पर मेला क्षेत्र में कभी भी हमला कराया जा सकता है।'

साध्वी ने अपनी जान पर खतरे की आशंका जताते हुए प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि प्रशासन ने बृहस्पतिवार तक यदि उनकी मांग नहीं मानी तो वह उन लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने पर बाध्य होंगी।

मंगलवार को ध्वजारोहण समारोह के दौरान भवंता ने मंच पर जाकर महिला संतों के परी अखाड़े को कुंभ के दौरान समान अधिकार एवं स्थान देने की मांग उठाई थी। तब मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस भी मंच पर थे। उसी समय महंत ज्ञानदास के कहने पर कुछ संतों ने साध्वी के हाथ से माइक छीनकर उन्हें चुप कराने की कोशिश की थी।

साध्वी ने अपने नेतृत्ववाले परी अखाड़े की पेशवाई भी इस बार उसी तरह ठाटबाट से निकालना चाहती हैं, जैसे सदियों से 13 अखाड़ों की पेशवाई निकलती आ रही है। पुरुष संतों-संन्यासियों के अखाड़े इस नई रीति का विरोध कर रहे हैं।

परी अखाड़े का निर्माण 2013 के प्रयाग कुंभ के दौरान किया गया था। यदि इसे प्रशासन एवं अन्य अखाड़ों के समान अधिकार नहीं मिला तो निकट भविष्य में टकराव बढ़ सकता है।