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    बेहमई कांड : 37 साल बाद भी न्याय की आस, फूलन सहित कई आरोपियों की हो चुकी है मौत

    Published: Wed, 14 Feb 2018 11:22 PM (IST) | Updated: Wed, 14 Feb 2018 11:27 PM (IST)
    By: Editorial Team
    phoolan devi news 14 02 2018

    कानपुर। बेहमई में दस्यु सुंदरी फूलन देवी के गैंग की गोलियों का शिकार बने लोगों की विधवाओं को 37 साल बाद भी न्याय नहीं मिल सका है। न्याय की आस में कई विधवाएं व घायल दुनिया छोड़ चुके हैं। गिरोह की सरगना समेत कई डकैतों की भी मौत हो चुकी है। डकैत मान सिह अभी तक फरार है। अब केवल पांच डकैतों के खिलाफ स्पेशल जज डकैती की कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

    यमुना बीहड़ पट्टी के गांव बेहमई में 14 फरवरी 1981 को दस्यु फूलन देवी के गिरोह ने दिनदहाड़े नरसंहार किया था। अपनों को गंवाने वाले गांव के राजाराम सिह ने फूलन व गिरोह के खिलाफ सिकंदरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

    फूलन व गिरोह के पोसा, श्याम बाबू, भीखा, रामसिह, विश्वनाथ आदि के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था। 16 साल की उम्र में विधवा होने वाली लाल सिह, शिवराम, सुरेंद्र सिह व दशरथ सिह की पत्नियों को आज भी न्याय का इंतजार है।

    गोलियों से घायल कई गवाहों की मौत हो चुकी है। इतने लंबे समय के बार भी बेहमई वासियों को न्याय नहीं मिल सका है। विधवाओं की टीस ये भी है कि घटना के कुछ समय बाद तक सहानुभूति जताने वाले नेता भी उन्हें भूल चुके हैं। सरकार की तरफ से भी कोई अतिरिक्त मदद नहीं मिली।

    वादी राजाराम सिह का कहना है कि मुकदमे की सुनवाई विभिन्न अदालतों में कानूनी दांव पेंच का शिकार होते हुए अब स्पेशल जज डकैती की कोर्ट में चल रही है। घटना में शामिल रहे डकैत पोसा व राम सिह जेल में हैं, जबकि भीखा, विश्वनाथ व श्याम बाबू जमानत पर हैं। डकैत मानसिह को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी है।


    जल्द निर्णय आने की उम्मीद -

    मामले की अदालत में पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने कहा कि अभियोजन की तरफ से चार साल पहले पूरी फाइल प्रस्तुत कर दी गई थी। चार बार इस पर बहस भी हो चुकी है। किन्हीं कारणों से बचाव पक्ष की बहस पूरी नहीं हो पा रही।

    मामला स्पेशल कोर्ट एंटी डकैती में चल रहा है। इस कोर्ट में वरिष्ठता क्रम से ही न्यायाधीश आते हैं। सुप्रीम कोर्ट के एक्सन प्लान के तहत इसे प्रथम वरीयता पर रखा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही इस पर निर्णय आएगा।

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