नई दिल्ली। सेना ने सैन्य आधुनिकीकरण के लिए कम बजट आवंटन पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि चीन और पाकिस्तान से दो मोर्चे पर जंग के खतरों को देखते हुए सेना के आधुनिकीकरण को गति देने की जरूरत है। सेना का 68 फीसद साजोसामान संग्रहालय में विरासत के रूप में रखने लायक हो चुका है।

सेना उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल शरत चंद ने स्थायी संसदीय समिति के समक्ष यह सनसनीखेज बयान देते हुए कहा है कि बजट की कमी के चलते सैन्य आधुनिकीकरण की कई परियोजनाएं बंद करनी पड़ सकती हैं। सैन्य आधुनिकीकरण पर सरकार के दावों के विपरीत सेना उप प्रमुख का दिया यह बयान सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। वहीं विपक्ष को राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सरकार पर वार करने का यह मुद्दा बन सकता है।

भाजपा नेता मेजर जनरल रिटायर्ड बीसी खंडूरी की अध्यक्षता वाली रक्षा संबंधी स्थायी संसदीय समिति की यह रिपोर्ट मंगलवार को संसद में रखी गई। लेफ्टिनेंट जनरल शरत चंद ने संसदीय समिति के समक्ष अपने मौखिक बयान में कहा है कि 2018-19 का रक्षा बजट सेना के लिए एक झटके से कम नहीं है। उन्होंने संसदीय समिति से सेना के हथियारों और साजोसामान की मौजूदा वास्तविकता की खोल कर रख दी है।

उन्होंने बताया कि सेना का 68 फीसद साजोसामान विंटेज श्रेणी यानी संग्रहालय में विरासत के रूप में रखने लायक है। केवल 24 फीसद साजोसामान ही मौजूदा समय के लायक है। जबकि सेना के पास केवल आठ फीसद साजोसामान ऐसे हैं जो पूरी तरह 'स्टेट आफ द आर्ट' यानी आधुनिक हैं। जबकि मौजूदा समय में किसी भी आधुनिक सेना के पास एक तिहाई साजोसामान विंटेज श्रेणी, एक तिहाई मौजूदा जरूरत के अनुकूल और एक तिहाई स्टेट आफ द आर्ट यानी आधुनिक साजोसामान का औसत होना चाहिए। इस पैमाने पर भी भारतीय सेना गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है।

चीन से लगी सीमा पर तैयारियों को 902 करोड़ रुपये कम मिले-

सेना उप प्रमुख ने चीन से लगी सीमा पर उसकी निर्माण गतिविधियों को देखते हुए अपनी सीमा से सटी सड़कों और ढांचागत सुविधिाओं के विकास को गति देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस जरूरत को पूरा करने के लिहाज से भी बजट में सेना की मांग से 902 करोड़ रुपये कम मिले हैं। उन्होंने सेना के समक्ष चीन और पाकिस्तान के साथ दो मोर्चे पर वास्तविक जंग के खतरों का जिक्र करते हुए कहा कि चीन और पाकिस्तान अपनी सेनाओं का आधुनिकीकरण बेहद तीव्र गति से कर रहे हैं जिस पर गौर करना होगा।

21,338 करोड़ रुपये का आवंटन अपर्याप्त-

थल सेना उप प्रमुख ने उम्मीद से कम बजट आवंटन की चुनौतियों से समिति को रूबरू कराते हुए कहा है कि कुछ मदों में राशि की जो वृद्धि की गई है वह टैक्स आदि के खर्च की भरपाई के लिए भी पर्याप्त नहीं है।

आधुनिकीकरण के लिए 21,338 करोड़ के आवंटन को अपर्याप्त बताते हुए उन्होंने कहा है कि यह तो पहले से चिन्हित और तय 29,033 करोड़ रुपये के खर्च को भी पूरा नहीं कर पाएगा। आपात स्थिति के लिए खरीद समेत 125 स्कीमों की जरूरत भी इससे पूरी नहीं होगी।

वहीं पिछले वित्त वर्ष की देनदारी का दबाव भी इसी पर होगा और यह सेना के लिए आर्थिक तंगहाली की स्थिति होगी। इन परिस्थितियों से साफ है कि आधुनिकीकरण के लिए वस्तुतः सेना के पास बजट में शायद ही कुछ बचेगा।