रांची। रिम्स (राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सांइस)का नवजातों के साथ फिर से अमानवीय चेहरा सामने आया। पांच घंटे तक एक नवजात दूसरे नवजात के शव के साथ एक ही बेड पर सोया रहा। 20 दिनों पहले भी एक नवजात का शव दो दिनों तक एनआइसीयू में पड़ा रहा। दुर्गंध फैलने के बाद रिम्स प्रबंधन की नींद टूटी।

उस लापरवाही के लिए आज तक किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। रिम्स प्रबंधन ने संजीदगी दिखाई होती या कार्रवाई की होती तो दोबारा घटना की पुनरावृत्ति नहीं होती।

मंगलवार को मीडिया को जब इसकी सूचना मिली तो लोग वहां पहुंचे। इसके बाद रिम्स प्रबंधन सक्रिय हुआ और उसके द्वारा बच्चे को हटाया गया।

रिम्स प्रबंधन द्वारा बकायदा निर्देश जारी किया गया है कि वार्ड में किसी भी मरीज की मौत होने पर सुपरवाइजरों को 15 मिनट के अंदर शव को हटा देना है। यह आदेश सिर्फ कागजों में ही सिमटकर रह गया है।

चतरा के रहने वाले 11 वर्षीय बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई और उसके शव को ले जाने का इंतजाम समय पर नहीं किया गया। उसके परिजन शव को घर ले जाने के लिए इधर से उधर भटकते रहे। जब इसकी जानकारी रिम्स प्रबंधन को दी गई, तब रिम्स प्रबंधन द्वारा सुविधा उपलब्ध कराई गई।

'संसाधनों की कमी के कारण एक बेड पर दो बच्चे को रखकर फोटोथेरेपी की जाती है, लेकिन बच्चे की मौत होने पर उसे 15 मिनट में हटाने का निर्देश है। हालांकि इस घटना की जानकारी नहीं है। लेकिन, अगर ऐसा किसी के द्वारा किया गया होगा तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।' डॉ. विवेक कश्यप अधीक्षक, रिम्स