शाहजहांपुर। शाजहांपुर के एक गांव में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम करते हुए एक परिवार ने निकाह के कार्ड पर भगवान राम और सीता की तस्वीर छपवाकर लोगों को न्योता दिया है। इबादत अली ने हर धर्म को इज्जत देने के अपने जज्बे को कायम रकते हुए ये फैसला किया।

18 सौ की आबादी वाले गांव में इबादत अली का अकेला मुस्लिम परिवार है। उनकी बेटी रुकसार बानो का निकाह 30 अप्रैल को तय हुआ है। इबादत के बेटे उमर का कहना है कि वह लोग पांचों वक्त नमाज पढ़ते हैं और पूरे रोजे रखते हैं, लेकिन जब गांव में हिदुओं का कोई त्योहार होता है तो उसे भी मिलकर मनाते हैं।

उमर का कहना है कि पहले हम हिदुस्तानी हैं इबादत अली के परिवार की इस पहल की जहां हर कोई सराहना कर रहा है। इबादत अली के फैसले का कुछ लोगों ने विरोध भी किया, पर इससे उन लोगों को फर्क नहीं पड़ता। वे लोग पहले हिदुस्तानी हैं। उमर कहते हैं कि उन लोगों को उसी गांव में रहना है। सभी के साथ पारिवारिक रिश्ता है। सभी को निमंत्रण कार्ड दिए जा चुके हैं। दो भाई व दो बहनों में पहली शादी है। जिसे वे लोग धूमधाम से करना चाहते हैं।

उलमा ने जताया एतराज

इस मामले में उलमा ने एतराज जताते हुए फिर से कार्ड छपवाने की नसीहत दी। निकाह के कार्ड पर श्रीराम का चित्र छपवाकर इबादत का परिवार उलमा के निशाने पर आ गया है। उलमा ने कहा है कि इस्लाम में इसकी इजाजत नहीं है इसलिए दूसरा कार्ड छपवाने की नसीहत दी है। देवबंदी उलमा इसे गलत मानते हैं। मदरसा जामिया शेखुल हिद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि इस्लाम दूसरे मजहब की इज्जत करने की इजाजत देता है, लेकिन उसे अपनाने की नहीं।