बलिया। छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुए नक्सली हमले में सीआरपीएफ के जवान मनोज कुमार सिंह के शहीद होने की खबर मंगलवार को उप्र के बलिया स्थित उनके गांव उसरौली पहुंचते ही मातम छा गया। पल भर में ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। हर कदम शहीद के दरवाजे की तरफ चल पड़े।

घर के अंदर से उनकी पत्नी सुमन की दहाड़ मारकर रोने की आवाज से हर किसी की आंखें नम हो जा रही थीं। शहीद के पिता नरेंद्र नारायण सिह (70) भी सीआरपीएफ से रिटायर्ड हैं। वह घटना को सुनते ही सन्न हो गए। वह बस बरामदे में चौकी पर बैठकर एक टक आने वालों को देखते रहे। उनके आंसू थम नहीं रहे थे।

दिन में करीब 11 बजे शहीद मनोज के चाचा सुमंत के नंबर पर इसकी सूचना सीआरपीएफ के अधिकारियों ने दी। इस खबर से वह अवाक हो गए। इसकी जानकारी उन्होंने धीरे-धीरे परिवार के अन्य सदस्यों को दी। घर के अंदर महिलाओं की चीत्कार सुनकर आसपास की महिलाएं भी आ गईं। महिलाएं शहीद की पत्नी को संभालने में लगी रहीं। रिश्तेदार भी पहुंचने लगे थी। अब हर किसी को उसके शव के आने का इंतजार था।

मां का मुंह देखते रहे लाडले -

नक्सली हमले में शहीद मनोज के दो बेटे प्रिस (6) व प्रतीक (4) दहाड़ मारकर रो रही मां सुमन के पास चुपचाप खड़े थे। दरवाजे पर जुट रही भीड़ से वह जानने की कोशिश कर रहे थे कि हुआ क्या है। कोई भी उन्हें कुछ बता नहीं रहा था लेकिन अपनी मां को रोते देख वे इसका कारण जानना चाह रहे थे। परिवार के अन्य सदस्य उन्हें दूर ले जा रहे थे लेकिन वह मां के पास ही खड़े रहे।

चार दिन पूर्व ही छुट्टी से गए थे ड्यूटी पर-

छत्तीसगढ़ के सुकमा में शहीद मनोज कुमार सिह 15 दिन की छुट्टी में होली में गांव उसरौली आए थे। वह छुट्टी बिता कर 10 मार्च को अपनी ड्यूटी पर गए। उन्होंने अपने पिता से नया मकान बनाने की बात कही थी। इनका एक भाई दिल्ली में प्राइवेट सर्विस करता है। ड्यूटी पर जाते समय वह जल्द आने का वादा अपने बधाों से कर गए थे, लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था।

सुकमा में शहीद हुए शोभित के घर भी कोहराम-

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में मंगलवार को नक्सलियों के हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के नौ जवानों में उप्र स्थित हापुड़ के मोहल्ला शांति विहार के रहने वाले शोभित शर्मा भी शामिल हैं। मंगलवार दोपहर छत्तीसगढ़ के सीआरपीएफ कंट्रोल रूम से जैसे ही शहीद के परिवार को इस दुखद खबर का पता लगा, वहां कोहराम मच गया। शहीद के घर पर सांत्वना देने के लिए जनप्रतिनिधियों का जमावड़ा लग गया। शोभित दो दिन पहले ही होली की छुट्टी पूरी करने के बाद छत्तीसगढ़ के लिए रवाना हुए थे।

मूलरूप से गांव मुदाफरा के रहने वाले राधेश्याम शर्मा काफी समय पहले मेरठ रोड स्थित शांति विहार कालोनी में रहने आ गए थे। वह प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत्त थे और दो साल पहले उनका निधन हो चुका है। राधेश्याम शर्मा के चार पुत्रों में से तीसरे नंबर के शोभित 14 साल पहले सीआरपीएफ में बतौर कांस्टेबल भर्ती हुए थे।

वर्तमान में छत्तीसगढ़ के सुकमा में उनकी पोस्टिग थी। 18 फरवरी को शोभित होली की छुट्टी लेकर घर आए थे। शहीद के छोटे भाई संदीप ने बताया कि दो दिन पहले ही छुट्टी खत्म होने पर वह लौट गए थे। मंगलवार को ही वह छत्तीसगढ़ पहुंचे थे और वहां से सरकारी वाहन में सवार होकर सुकमा के लिए जा रहे थे।

संदीप ने बताया कि मंगलवार की दोपहर वहां के कंट्रोल रूम से उनकी भाभी ज्योति के फोन पर कॉल आई। इसमें बताया गया कि शोभित शहीद हो गए हैं। शहीद शोभित का इकलौता पुत्र कृष्णा (8) कक्षा तीन का छात्र है। इस दर्दनाक खबर मिलने के बाद से वह काफी गुमसुम हो गया है। शहीद की पत्नी ज्योति का भी रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है।

शहीद जवानों के परिवार को उप्र सरकार देगी 25-25 लाख की मदद-

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि सुकमा (छत्तीसगढ़) में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में शहीद उप्र के जवानों के आश्रितों को प्रदेश सरकार 25-25 लाख रुपये की आर्थिक मदद देगी। इसमें से 20 लाख शहीद की पत्नी को और बाकी पैसा उनके माता-पिता को दिया जाएगा।

योगी ने मुठभेड़ में शहीद जवानों को श्रद्धाजलि देते हुए उनके परिवारीजन के प्रति संवेदना भी जतायी। निर्देश दिया कि जिले के प्रभारी मंत्री शहीद जवानों के घर जाकर उनके परिवारीजन को ढाढस बधाएं। मालूम हो कि सुकमा में नक्सलियों से हुई मुठभेड़ में बलिया के मनोज सिंह, गाजियाबाद के शोभित कुमार शर्मा और मऊ के धर्मेंद्र सिंह शहीद हुए हैं।