चंडीगढ़। हरियाणा में एसिड अटैक (तेजाब हमला) पीड़ितों की मदद के लिए सरकार आगे आई है। तेजाब से हमले के पीड़ितों को जहां राजकीय अस्पतालों और सरकार के पूल में शामिल अस्पतालों में मुफ्त उपचार मिलेगा, वहीं निजी अस्पताल भी इलाज से इन्कार नहीं कर सकेंगे।

तुरंत उपचार के लिए एफआइआर की जरूरत नहीं होगी। पीड़ितों को उपचार के लिए एक लाख रुपये की मदद के अलावा विकलांगता की स्थिति में हर महीने आठ हजार रुपये की मदद मिलेगी।

साथ ही राशन डिपो देने में तेजाब पीड़ितों को वरीयता दी जाएगी। प्रदेश सरकार ने 18 वर्ष तक की तेजाब पीड़ित लड़कियों और लड़कों के लिए राहत एवं पुनर्वास योजना नीति बनाई है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री कविता जैन ने बताया कि दो मई 2011 के बाद तेजाब हमले से कोई भी पीड़ित इस योजना का पात्र होगा।

जहां तेजाब पीड़ित का पूरा उपचार नहीं हुआ या उपचार की सभी प्रक्रियाएं समाप्त हो गई हैं तो पीड़ित को लगातार उपचाराधीन माना जाएगा। संबंधित जिले के मेडिकल बोर्ड से प्रमाणित अनुसार अक्षम व्यक्तियों की श्रेणी में गंभीर तेजाब पीड़ित व्यक्ति का इलाज किया जाएगा।

मंत्री ने बताया कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग विकलांगता के दायरे में आने वाले तेजाब पीड़ितों को आठ हजार रुपये की मासिक वित्तीय सहायता देगा।

वारदात के 15 दिनों के भीतर तेजाब पीड़ित को इलाज के लिए उपायुक्त 25 हजार तथा महिला एवं बाल विकास विभाग 75 हजार रुपये देगा। अस्पताल में पीड़ित की दवा, भोजन, बेडिंग, प्लास्टिक या रीकंस्ट्रक्टिव सर्जरी सहित सभी खर्च महिला एवं बाल विकास विभाग उठाएगा।

मंत्री ने कहा कि सरकारी स्वामित्व या निजी स्वामित्व का कोई भी अस्पताल किसी भी स्तर पर किसी भी पीड़ित को उपचार से इन्कार नहीं कर सकेगा।

पीड़ित को उपचार के लिए लाते ही अस्पताल प्रबंधन तत्काल जिला बोर्ड या राज्य बोर्ड और उसकी पुलिस को सूचित करेगा।

दावों पर विचार करेंगी राज्य और जिला स्तरीय समितियां : तेजाब से हमलों के दावों पर विचार करने और राहत, पुनर्वास और प्रतिपूर्ति देने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्री की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति (एसएलसी) गठित की गई है। विभाग के निदेशक इस समिति के सदस्य सचिव होंगे।

सदस्यों में महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तथा अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के प्रशासनिक सचिवों को शामिल किया गया है।

इसके अलावा उपायुक्तों की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति काम करेंगी जो आवेदनों का निपटारा करेंगी।