नई दिल्ली, ब्‍यूरो। हरियाणा विधानसभा चुनाव में नंबर वन पार्टी बनने की होड़ के बीच शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों को अहम माना जा रहा है। हरियाणा की अपनी आखिरी रैलियों में मोदी न सिर्फ जाटलैंड जींद को झकझोरेंगे बल्कि उत्तर में बग्गड़ क्षेत्र के सिरसा और दक्षिण में अहीरवाल गुड़गांव की जनता को संबोधित कर भाजपा के लिए बहुमत पर मुहर लगाने की कोशिश करेंगे। उम्मीद की जा रही है कि मोदी खासकर जींद में चौटाला और हुड्डा की नींव को हिलाने की कोशिश करेंगे।

हरियाणा में पहली बार सत्ता में आने की कोशिश में जुटी भाजपा इस बार कोई कसर छोड़ना नहीं चाहती है। खुद प्रधानमंत्री मोदी समेत गृहमंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की हरियाणा में तीन दर्जन से ज्यादा रैली हो चुकी है। लगभग हर वर्ग को संदेश दिया जा चुका है। लेकिन शनिवार को जींद में होने वाली मोदी की रैली सबसे अहम साबित हो सकती है।

दरअसल भाजपा के विपक्ष में खड़े मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और इनेलो के ओम प्रकाश चौटाला का असर जाट मतदाताओं पर अभी खत्म नहीं हुआ है। 90 सदस्यीय विधानसभा में लगभग 40 सीटों पर जाटों की प्रभावी असर भी है। भाजपा नहीं चाहेगी कि किसी भी स्थिति में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बने। यही कारण है कि मोदी की अंतिम दो सभाओं में जींद को शामिल किया गया है।

सूत्रों के अनुसार जाटों का युवा वर्ग तो भाजपा से प्रभावित है ही लेकिन बुजुर्ग जाट समुदाय को भी मोदी साधने की कोशिश करेंगे। माना जा रहा है कि दस-पंद्रह फीसद जाट अगर भाजपा के पक्ष में आ जाएं तो पार्टी को बहुमत मिल सकता है। जींद की रैली में मोदी के मंच पर ही कांग्रेस छोड़कर आए बड़े जाट नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह और कैप्टन अभिमन्यु भी मौजूद होंगे। भाजपा ने सबसे ज्यादा लगभग ढाई दर्जन टिकट जाटों को ही दिए हैं।

गौरतलब है कि अहीर नेता के रूप में राव इंद्रजीत सिंह और गुर्जर में कृष्णपाल गूजर मोदी सरकार की कैबिनेट में शामिल हैं। टिकट वितरण में हर समुदाय को साधने की कोशिश हो चुकी है। अब भाजपा को मोदी की अंतिम चोट का इंतजार है।