नई दिल्ली। आखिरी चरण के मतदान से पहले चुनाव आयोग में खींचतान शुरू हो गई है। अभी तक माना जा रहा था कि इस चुनाव में चुनाव आयोग ने बड़बोले नेताओं पर सख्त कार्रवई की है, लेकिन आयोग के अंदर से जो विवाद सामने आ रहा है, वह अलग ही कहानी बयां कर रहा है। चुनाव आयोग की तीन सदस्यीय कमीशन में मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा और दो चुनाव आयुक्त अशोक लवासा और सुशील चंद्रा शामिल थे।

इसमें से चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने चुनाव आयोग की मीटिंग में शामिल होने से साफ मना कर दिया है। बताया जा रहा है कि लवासा ने यह फैसला अल्पमत के फैसले को रिकॉर्ड नहीं किए जाने के विरोध में लिया। उन्होंने कहा कि मीटिंग में जाने का कोई मतलब नहीं है, इसलिए दूसरे उपायों पर विचार कर सकता हूं।

लवासा में खत में मांग की है कि 3 सदस्यीय आयोग में अगर किसी मुद्दे पर किसी सदस्य का विचार अलग है, तो संबंधित आदेश में बाकायदा उसका भी जिक्र हो। लवासा चाहते हैं कि जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के आदेश में बेंच के जजों के अलग-अलग विचारों का स्पष्ट जिक्र होता है, वैसा ही चुनाव आयोग के मामले में भी हो।

उन्होंने दावा किया था कि पीएम मोदी को विवादित बयानों के मामले में क्लीन चिट दिए जाने पर मेरे फैसले को रिकॉर्ड नहीं किया गया। सूत्रों ने कहा कि लवासा ने पीएम मोदी के भाषणों और अमित शाह के एक भाषण पर क्लीन चिट पर अपनी असहमति जताई है। चुनाव आयोग ने पीएम मोदी द्वारा गुजरात के पाटन में 21 अप्रैल को दिए गए भाषण के मामले में क्लीन चिट दे दी थी। इस फैसले पर लवासा ने असहमति जताई थी।

बताते चलें कि प्रधानमंत्री ने गुजरात में कहा था कि उनकी सरकार ने भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान की सुरक्षित रिहाई के लिए पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था। यह उनका छठा भाषण था, जिसे पोल बॉडी ने क्लीन चिट दे दी थी। चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र के नांदेड़ में दिए गए मोदी के भाषण में भी कुछ गलत नहीं पाया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कांग्रेस को 'डूबते हुए टाइटैनिक' के रूप में संदर्भित किया था।

इससे पहले पोल बॉडी ने वर्धा में मोदी के एक अप्रैल के भाषण को क्लीन चिट दे दी थी, जिसमें उन्होंने केरल में अल्पसंख्यक बहुल सीट से चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर हमला किया था। लातूर में पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं से मोदी ने अपना वोट 'पुलवामा शहीदों' को समर्पित करने की अपील 9 अप्रैल को की थी, जिसे चुनाव आयोग ने क्लियर कर दिया था।