नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि विवाद की जल्द सुनवाई के लिए बार-बार गुहार लगाने वाले भाजपा नेता सुब्रह्माण्यम स्वामी की हस्तक्षेप अर्जी पर बुधवार को मुख्य मामले के साथ सुनवाई से इन्कार कर दिया। हालांकि कोर्ट ने रामजन्मभूमि पर पूजा-अर्चना का अधिकार मांगने वाली स्वामी की याचिका पर अलग से सुनवाई किए जाने का निर्देश दिया है।

बुधवार को राम जन्मभूमि मामले में सुनवाई के दौरान जब-जब अर्जी का नंबर आया, तो स्वामी ने कहा कि उन्होंने रिट याचिका दायर कर जन्मभूमि में पूजा-अर्चना का मौलिक अधिकार मांगा था। उनका पूजा अर्चना का मौलिक अधिकार संपत्ति के अधिकार से ऊपर है। इसलिए कोर्ट को उनकी अर्जी पर सुनवाई करनी चाहिए।

एक अन्य पीठ ने उनको रिट याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए मुख्य मामले में हस्तक्षेप अर्जी दाखिल करने की इजाजत दी थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह पक्षकारों के अलावा किसी की भी हस्तक्षेप अर्जी पर सुनवाई का इच्छुक नहीं है। इसलिए इस अर्जी पर भी सुनवाई नहीं करेगा। हालांकि उनकी मुख्य रिट याचिका पर उचित पीठ सुनवाई करेगी।

क्या है राम जन्मभूमि मामला-

इलाहाबाद हाई कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 30 सितंबर, 2010 को दो-एक के बहुमत से राम जन्मभूमि को तीन बराबर हिस्सों में रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में बांटने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट नेनौ मई, 2011 को हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी और सभी पक्षों को यथास्थिति कायम रखने का आदेश दिया था।