नई दिल्ली। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना "आयुष्मान भारत" में आयुर्वेद की अहम भूमिका होगी। देश में खुलने वाले 1.5 करोड़ आरोग्य केंद्रों में आयुर्वेदिक दवाएं भी उपलब्ध होंगी। सामुदायिकचिकित्सा केंद्रों और जिला अस्पतालों में आयुर्वेदिक दवाओं से इलाज का पायलट प्रोजेक्ट अलग से चल रहा है। आयुष मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार आरोग्य केंद्रों में आयुर्वेद के साथ-साथ यूनानी, सिद्ध, प्राकृतिक चिकित्सा और योग को भी जगह मिलेगी।

ध्यान देने की बात है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट में आयुष्मान भारत के तहत 1.5 करोड़ आरोग्य केंद्र खोलने की घोषणा की थी ताकि आम लोगों को पड़ोस में चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। इन केंद्रों में सामान्य बीमारियों की मुफ्त दवाएं भी उपलब्ध होंगी। वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोग्य केंद्रों में आम आदमी को निरोग बनाने के लिए देसी चिकित्सा पद्धति अपनाने पर जोर दिया जाएगा। इन केंद्रों में योग के प्रशिक्षण के साथ-साथ यूनानी, आयुर्वेद और सिद्ध से जुड़ी दवाएं भी मौजूद होंगी।

दरअसल, देश में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसी बीमारियों पर नियंत्रण और इलाज में योग और आयुर्वेद काफी हद तक सफल रहा है। काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रीयल रिसर्च (सीएसआइआर) ने डायबिटीज के इलाज के लिए बीजीआर-34 नामक आयुर्वेदिक दवा विकसित की थी।

एमिल फार्मास्यूटिकल्स द्वारा बाजार में बेची जा रही यह दवा दो साल के भीतर डायबिटीज के इलाज में 20 बड़े ब्रांड में शामिल हो गई है। यही वजह है कि जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के इलाज में आयुर्वेद को चिकित्सा प्रणाली में औपचारिक रूप से शामिल करने का काम शुरू हो चुका है। प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों और जिला अस्पतालों में डायबिटीज और उच्च रक्तचाप से जुड़ी बीमारियों के इलाज में आयुर्वेदिक दवाओं को शामिल करने का पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है।

इसके तहत सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइसेंस (सीसीआरएएस) और डायरेक्टोरेट ऑफ हेल्थ सर्विसेस (डीजीएसएस) ने साथ मिलकर 49 कम्युनिटी सेंटरों और तीन जिला अस्पतालों में आयुर्वेदिक दवाओं से मरीजों का इलाज शुरू किया है। जिसे आगे पूरे देश में लागू करने पर विचार किया जा रहा है। सरकार की कोशिश आम लोगों को इलाज के लिए समग्र चिकित्सा उपलब्ध कराने की है और यह सिर्फ एलोपैथिक दवाओं से नहीं हो सकता।