नवनीत श्रीवास्तव, फैजाबाद। बाबर के वंशज और मुगल सल्तनत के आखिरी बादशाह बहादुर शाह जफर की छठवीं पीढ़ी के वंशज प्रिंस याकूब हबीबुद्दीन तुसी यूं तो अपनी शानो-शौकत भरी जिंदगी जीने के लिए जाने जाते हैं लेकिन, इन दिनों वह रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के समर्थक के तौर पर सुर्खियों में हैं।

मंगलवार को प्रिंस अयोध्या में थे। वह कहते हैं कि बाबर के नाम पर रामजन्मभूमि पर मस्जिद की पैरवी करने वाले अपनी रोटी सेंक रहे हैं। प्रिंस का कहना है कि बाबर ने कोई मंदिर नहीं तोड़ा और न ही वह कट्टर थे। उन्होंने कहा कि बाबर ने जब हुमायूं को वसीयत लिखी थी तो उसमें स्पष्ट कहा था कि हिदुस्तान के संत-महंत का आदर करना, मंदिर और गाय की हिफाजत करना। सभी बादशाहों ने बाबर की उसी वसीयत के अनुरूप शासन चलाया। वैसे भी बाबर का शासन सिर्फ चार साल का रहा और इस काल में भी वह ज्यादातर समय हिंदुस्तान के बाहर रहे, तो कैसे कह सकते हैं कि बाबर ने मंदिर तोड़ा। इसलिए यह कहना सही नहीं कि बाबर ने मंदिर तोड़ा। हां, उनके किसी आदमी से यदि गलती हुई तो मैं क्षमा मांगने को तैयार हूं। अब राम जन्मभूमि पर भव्य राममंदिर का निर्माण करना चाहिए। प्रिंस तुसी कहते हैं कि यूं भी यदि रामजन्मभूमि पर हीरे की मस्जिद बना दी जाए तो भी कोई नमाज अदा नहीं करेगा, क्योंकि वहां कानूनी झगड़ा है और किसी भी झगड़े की जमीन पर नमाज अदा नहीं की जा सकती है।

बोर्ड की राय महत्वहीन प्रिंस तुसी कहते हैं कि इस मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की राय का कोई महत्व नहीं है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सिर्फ एनजीओ मात्र है। बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में पार्टी भी नहीं है। इसलिए बोर्ड की राय का कोई मतलब नहीं है।

श्रीश्री से लेना-देना नहीं

इस विवाद को सुलझाने के लिए श्रीश्री रविशंकर की ओर से किए जा रहे प्रयासों से प्रिंस अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। उनका कहना है कि रामजन्मभूमि पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता है। रामजन्मभूमि पर सिर्फ राम मंदिर का ही निर्माण होना चाहिए। इस मुहिम को सुन्नी सोशल फोरम के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।

रामलला के किए दर्शन

प्रिंस याकूब हबीबुद्दीन तुसी मंगलवार को यहां कारसेवकपुरम से निकली रामराज्य रथ यात्रा में शामिल हुए। उन्होंने अधिग्रहीत परिसर जाकर रामलला के दर्शन किए।