नई दिल्ली। अगर आपका बैंक एकाउंट है और आप भी डेबिट या क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। दरअसल, कभी-कभार ऐसा होता कि बैंक किसी ऐसी सर्विस के लिए आपके खाते से पैसे काट लेता है, जो शायद आपने इस्तेमाल ही नहीं की हो या जिसके लिए आपने सहमति भी नहीं दी हो। ऐसा ही एक मामला बेंगलुरू में 1 फरवरी 2017 को 39 वर्षीय एच मंजूनाथ के साथ हुआ।

उन्होंने बताया कि उनके कोटेक बैंक लिमिटेड ने खाते से बैंक ने 2,499 रुपए की कटौती की थी। इसके बदले में उन्हें मैसेज मिला- जिसमें कहा गया था कि उनके स्पेशल कार्ड प्रोटेक्शन प्लान के तहत यह राशि काटी गई है। बताते चलें कि कार्ड प्रोटेक्शन प्लान (सीपीपी) एक सेवा है, जो कई बैंक अपने ग्राहकों को सभी डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और रिटेल कार्ड के बीमा के रूप में देते हैं।

मंजूनाथ इस मामले को कंज्यूमर कोर्ट में ले गए, जिसने फैसला दिया कि बैंक ने गलत तरीके से व्यापार किया है। इसके लिए बैंक को 10,000 रुपए का मुआवजा मंजूनाथ को देने का आदेश दिया गया। मामले को कंज्यूमर कोर्ट में ले जाने से पहले मंजूनाथ ने अगले दिन बैंक मैनेजर से बात की और गलत तरीके से पैसे खाते से काटे जाने की शिकायत की। उन्होंने कहा कि बैंक ने उनकी सहमति के बिना यह राशि उनके खाते से काटी है।

मैनेजर ने मंजूनाथ को जवाब दिया कि यह वार्षिक शुल्क है, जो ग्राहक 'कार्ड सुरक्षा योजना' के लिए भुगतान करते हैं। तब भी मंजूनाथ ने कहा कि उन्होंने इसके लिए सहमति नहीं दी थी और न ही इसके बारे में बैंक की ओर से बताया गया था। एक महीने तक बैंक से पैसे वापस नहीं मिलने के बाद उन्होंने कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था क्योंकि वह मामले को ऐसे ही नहीं हाथ से जाने देना चाहते थे। 18 महीनों की सुनवाई में दोनों पक्षों को सुनने के बाद जज ने फैसला दिया कि बैंक ऐसा कोई सबूत नहीं पेश कर पाया है कि उसने इस कटौती के लिए मंजूनाथ से मंजूरी ली हो।