मल्टीमीडिया डेस्क। सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मिली है कि देशभर के ब्लड बैंकों ने बीते पांच सालों में खून और इसके जरूरी अंश की 28 लाख यूनिट्स बर्बाद कर दी। महाराष्ट्र, यूपी, कर्नाटक, तमिलनाडु इसमें सबसे आगे रहे। खास बात यह है कि थोड़ा ध्यान दिया जाए, तो यह बर्बादी रोकी जा सकती है। एक नजर इसी से जुड़ी जरूरी बातों पर -

नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (नाको) में खून की बर्बादी का यह खुलासा चौंकाने वाला है, क्योंकि खून की कमी के कारण हर साल हजारों लोगों की मौत हो जाती है। खून ही नहीं, इसके अन्य अवयव जैसे प्लाज्मा और प्लेटलेट्स के बगैर भी कई मरीज दम तोड़ देते हैं। बता दें, ब्लड बैंक में रखा खून करीब एक महीने के बाद काम का नहीं रहता। प्लाज्मा को जरूर एक साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

ब्लड बैंक में डोनेशन से बेहतर है यह विकल्प

खून की बर्बादी रोकने के लिए ब्लड बैंक में डोनेशन करने से बेहतर है कि किसी ऐसी हेल्पलाइन या समूह से जुड़ा जाएं, जो जरूरत पड़ने पर आपको कॉल कर सके। देश की ऐसी पहली हेल्प लाइन अशोक नायक ने शुरू की है। उनके इस कॉल सेंटर में 'रक्त वाहिनी' नाम की वैन है, जो ब्लड डोनर को मुफ्त में लाने और ले जाने का काम करती है।

इससे जहां खून की जरूरत हो, वहां तत्काल मदद पहुंचती है। इसी तर्ज पर देश भर में कई संगठन काम कर रहे हैं। हजारों व्हाट्सएप ग्रुप हैं, जहां ब्लड डोनर्स की लिस्ट है। जरूरत के अनुसार मैसेज भेजे जाते हैं और जरूरतमंदों को तत्काल रक्तदान दाता मिल जाता है। अशोक नायक के कॉल सेंटर के नंबर हैं- 9200250000 और 9827666866.

इससे खून की कालाबाजारी भी रुकती है। डोनर के खून देने के दो घंटे के बाद सीधे मरीज को खून चढ़ाया जा सकता है। गर्भवती महिलाओं, एक्सिडेंट के केस में ताजे खून की मांग की जाती है।

क्या होता है प्लाज्मा का

देश की कई फार्मा कंपनियां एल्बुमिन तैयार करने के लिए प्लाज्मा विदेशों से खरीदती हैं। यह एक तरह का प्रोटीन है, जो प्राकृतिक तरीके से लिवर द्वारा तैयार होता है। मगर, साल 2016-17 में जमे हुए प्लाज्मा की तीन लाख यूनिट से ज्यादा बर्बाद हो गईं।

इसलिए हुआ खून बर्बाद

ब्लड बैंक में रखा गया खून करीब एक महीने के बाद काम का नहीं रहता है। वहीं, प्लाज्मा को स्टोर करके खून की तुलना में एक साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इसलिए खून और प्लाज्मा की बर्बादी हुई, जिसे किसी की जान बचाने में इस्तेमाल किया जा सकता था।

ताजे जमे हुए प्लाज्मा को फेंकने के मामले में यूपी और कर्नाटक सबसे आगे रहे। इससे जहां खून की जरूरत हो, वहां तत्काल मदद पहुंचती है। डोनर के खून देने के दो घंटे के बाद सीधे मरीज को खून चढ़ाया जा सकता है।

कॉल सेंटर ऐसे कर रहा है काम

अशोक नायक ने करीब आठ साल पहले देश का पहला ब्लड कॉल सेंटर शुरू किया था। उनके साथ देश के करीब सवा लाख मेंबर जुड़े हैं। यानी दिल्ली, मुंबई, पंजाब, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में कहीं भी जरूरत होने पर तत्काल खून की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है।

इंदौर में गंगवाल बस स्टैंड के पास उनका कॉल सेंटर हैं, जहां चार लोग काम करते हैं। यहां फोन करने के बाद मरीज का ब्लडग्रुप और रक्त कहां पहुंचाना है, इसके बारे में बताना होता है। यहां निगेटिव और दुर्लभ ब्लड ग्रुप जैसे एबी निगेटिव और खास 'बॉम्बे ब्लड ग्रुप' के लोग भी मेंबर हैं।

रक्त दान के बारे में जुड़े भ्रम दूर करें

होगी खून की कमीः कुछ लोगों को भ्रम है कि रक्तदान करने के बाद शरीर में खून की कमी हो जाएगी। यह पूरी तरह गलत धारणा है। रक्तदान के 48 घंटे बाद रक्त की क्षतिपूर्ति हो जाती है। इतना ही नहीं, अगर आप पूरी तरह स्वस्थ हैं, तो हर तीन महीने में एक बार रक्तदान कर सकते हैं।

सेहत को नुकसानः रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित है। इससे डोनर की सेहत को कोई नुकसान नहीं होता है। रक्तदान से दिल की बीमारियों की आशंका कम करने में सहायता होती है। शरीर में अतिरिक्त आयरन को जमने से रोकता है।

दर्द होता हैः रक्तदान के बारे में कुछ लोग मानते हैं कि यह दर्दनाक प्रक्रिया है, लेकिन यह गलत है। सुई चुभोने का एहसास होता है और रक्त निकलने में कोई परेशानी नहीं होती है।

बीपी का मरीज हूंः यदि रक्तदान के समय आपका बीपी 180 सिस्टोलिक से कम और 100 डाइस्टोलिक तक है तो आप रक्तदान कर सकते हैं। बीपी की गोलियां खाने से रक्तदान का कोई संबंध नहीं है।