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    सेना के लिए 7.4 लाख असाल्ट राइफलें खरीदेगी सरकार

    Published: Tue, 13 Feb 2018 09:43 PM (IST) | Updated: Wed, 14 Feb 2018 09:19 AM (IST)
    By: Editorial Team
    indian army 13 02 2018

    नई‍ दिल्‍ली। सेना की मारक क्षमता में इजाफा करने की बड़ी पहल करते हुए सरकार ने करीब 16 हजार करोड़ रुपये के रक्षा खरीद सौदे को मंजूरी दे दी है। इस रकम से करीब 7.4 लाख असाल्ट राइफलों के साथ-साथ स्नाइपर राइफलें, लाइट मशीनगन से लेकर नौसेना के लिए एडवांस टारपीडो सिस्टम की खरीद की जाएगी। जम्मू-कश्मीर में सीमा पर पाकिस्तान के साथ चल रही तनातनी के मद्देनजर सैन्य खरीद का यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है।

    रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पिछले एक महीने में सरकार ने मोर्चे पर तैनात सैनिकों को हथियारों से लैस करने के लिए उनके साथ रहने वाले तीन मुख्य हथियारों राइफल, कारबाइन और लाइट मशीनगन खरीदने की प्रक्रिया तेज कर दी है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) की बैठक में इन हथियारों की खरीद से जुड़े 15,935 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी। प्रस्तावों के मुताबिक 1819 करोड़ रुपये लाइट मशीनगनों की खरीद पर खर्च किए जाएंगे। इनकी खरीद रक्षा मंत्रालय की फास्ट ट्रैक खरीद प्रक्रिया के तहत की जाएगी। सेना की तत्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए फास्ट ट्रैक खरीद की जाती है।

    सबसे ज्यादा असाल्ट राइफलें

    रक्षा सौदे के इस अहम फैसले में सबसे बड़ी खरीद 7.4 लाख असाल्ट राइफलों की है। इनकी खरीद तीनों सेनाओं के लिए होगी। इन राइफलों की खरीद और निर्माण परियोजना पर 12,280 करोड़ रुपये खर्च होंगे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, फास्ट ट्रैक के अलावा बाकी लाइट मशीनगनों और असाल्ट राइफलों की खरीद में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कंपनी उनका निर्माण भारत में ही करे।

    स्नाइपर राइफलों के लिए वैश्विक टैंडर

    डीएसी ने सेना और वायुसेना के लिए 5719 स्नाइपर राइफलों की खरीद को भी मंजूरी दी है। इस खरीद पर 982 करोड़ रुपये की राशि खर्च होगी। बेहद मारक क्षमता वाले स्नाइपर राइफलों की खरीद वैश्विक टेंडर के जरिये होगी। इसके लिए जरूरी गोलियां शुरुआत में तो बाहर से मंगाई जाएंगी मगर बाद में उनका निर्माण भी भारत में होगा।

    850 करोड़ से नौसेना के लिए मरीच सिस्टम

    नौसेना की पनडुब्बी जंगी क्षमता और नौसैनिक युद्धपोतों की मारक क्षमता को बढ़ाने के लिए डीएसी ने एडवांस टारपीडो डिकाय सिस्टम की खरीद को मंजूरी दी है। डीआरडीओ ने इसके लिए स्वदेशी "मरीच" सिस्टम विकसित किया है और इसका सफलतापूर्वक परीक्षण भी हो चुका है। इसी मरीच को अब नौसेना के रक्षा बेड़े का हिस्सा बनाया जाएगा। फैसले के अनुसार "भारत इलेक्ट्रॉनिक्स" 850 करोड़ रुपये की लागत से नौसेना के लिए मरीच सिस्टम का निर्माण करेगा।

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