बेंगलुरु। अगले साल होने जा रहे आम चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देने के लिए बन रहे विपक्षी महागठबंधन की राह आसान नहीं लग रही है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस से किसी भी तरह का समझौता करने से इन्कार कर चुकी बसपा ने गुरुवार को कर्नाटक की गठबंधन सरकार से भी नाता तोड़ लिया।

राज्य की एचडी कुमारस्वामी सरकार में बसपा कोटे से एकमात्र मंत्री एन महेश ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि बसपा नेता का कहना था कि उन्होंने निजी कारणों से त्यागपत्र दिया है। वह जदएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार को अपना समर्थन देना जारी रखेंगे।

जबकि इस घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि बसपा का अगर यही रुख रहा तो विपक्षी दलों का प्रस्तावित महागठबंधन खटाई में पड़ सकता है।

कर्नाटक की जनता दल (एस)-कांग्रेस गठबंधन सरकार में प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री महेश ने मुख्य मंत्री एचडी कुमारस्वामी को अपना इस्तीफा सौंपा। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए महेश ने कहा कि वह अब अपने विधान सभा क्षेत्र कोलेगल पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करेंगे। साथ ही लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में बसपा को मजबूत करने का काम करेंगे।

बसपा विधायक के अनुसार, "मेरे विधान सभा क्षेत्र में मेरे खिलाफ एक अभियान शुरू हो गया था कि मैं बेंगलुरु में ही बस गया हूं और अपने क्षेत्र कोलेगल पर ध्यान नहीं दे रहा हूं। इसके अलावा लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में पार्टी को भी मजबूत करना जरूरी है।" उन्होंनें कहा कि वह गठबंधन सरकार को समर्थन देना जारी रखेंगे।

बकौल महेश, "सरकार में किसी से मुझे कोई शिकायत नहीं है। मंत्री रहते हुए मैंने पूरी क्षमता से काम किया। त्यागपत्र शुद्ध निजी कारणों से दिया।" ध्यान रहे पिछले दिनों महेश ने कांग्रेस, भाजपा और जनता दल एस पर करारा प्रहार किया था। कहा था, "मैं यह बात खुलेआम कह रहा हूं कि जब तक देश में जाति व्यवस्था कायम है, तब तक ही कांग्रेस, भाजपा और जनता दल जैसी पार्टियों का अस्तित्व है।