लखनऊ : उप्र सरकार के लिए मुसीबत बने बुलंदशहर हिंसा की गुत्थी सुलझाने की कसरत शुरू हो गई है। एडीजी इंटेलीजेंस एसबी शिरडकर ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी है। जांच में पुलिस अधिकारियों की चूक भी सामने आई है। घटनास्थल से कुछ दूरी पर गोवंश काटे गए थे लेकिन, अभी यह साफ नहीं हो सका है कि इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। कुछ लोगों के सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं लेकिन, इसकी पुष्टि को भी कोई तैयार नहीं है।

बुलंदशहर के स्याना क्षेत्र के जिस महाव गांव में गोवंश के बड़ी मात्रा में अवशेष मिले थे, उसके आसपास के क्षेत्र में करीब 30-35 गोवंश छुट्टा घूमा करते थे। सूत्रों का कहना है कि जांच में सामने आया है कि घटनास्थल से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक आम की बाग में गोवंश काटे जाने के साक्ष्य मिले हैं। इससे घटना के पीछे गहरी साजिश के संकेत भी साफ मिल रहे हैं।

माना जा रहा है कि गोवंश को बाग में काटा गया और फिर उसके अवशेष ले जाकर फेंके गए। हालांकि जांच में यह स्पष्ट नहीं हो सका कि गोवंश काटने का काम किसने किया और अवशेष फेंकने के पीछे किसकी साजिश थी। जांच में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह व सुमित को एक ही हथियार से निकली गोली लगने की पुष्टि हुई है। लेकिन, यह स्पष्ट नहीं हो सका कि हथियार किसका था। पुलिस घटना में प्रयुक्त हथियार को बरामद करने का प्रयास कर रही है।

गोवंश के अवशेष मिलने के बाद स्थानीय पुलिस की शुरुआती कार्रवाई व वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी लापरवाही से भरी रही। पुलिस ने पहले पूरे मामले को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे आक्रोश बढ़ा। इसके पीछे किसी साजिश को समझने में भी स्थानीय पुलिस नाकाम रही। ग्रामीणों की संख्या व आक्रोश बढ़ने पर समय पर अतिरिक्त पुलिस बल भी मौके पर नहीं पहुंच सका। यही वजह थी कि ग्रामीणों के भारी पड़ने पर पुलिसकर्मी भाग खड़े हुए। जांच रिपोर्ट में पूरे घटनाक्रम के साथ मौके से भागने वाले पुलिसकर्मियों का ब्योरा भी दिया गया है।