जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। ठीक 43 वर्ष के बाद भारत ने विश्व शक्ति को फिर से चकित किया है। बुधवार को स्वदेशी परमाणु रिएक्टरों के सहारे 7000 मेगावाट बिजली बनाने का सरकार का फैसला भी दूसरे देशों को स्तब्ध करने वाला होगा। इस फैसले से भारत ने अमेरिका, रूस समेत तमाम विकसित देशों को यह साफ संकेत दिया है कि परमाणु ऊर्जा के लिए वह अब उनकी तकनीक पर ज्यादा दिनों तक निर्भर नहीं रहेगा।

कैबिनेट ने 700-700 मेगावाट के परमाणु ऊर्जा के 10 रिएक्टर लगाने का फैसला लिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि भारत अपने बलबूते परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाने की क्षमता रखने वाले गिने चुने देशों में शामिल हो जाएगा। कैबिनेट के फैसलों के बारे में बिजली, कोयला, खनन व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में घरेलू तकनीक पर आधारित प्रेस्राइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर्स (पीएचडब्लूआर) की दस यूनिटें लगाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई गई है। इससे घरेलू उद्योगों को 70 हजार करोड़ रुपये के आर्डर मिलेंगे।

यह परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भारत को अत्याधुनिक तकनीक से संपन्न देशों की श्रेणी में ला देगा।गोयल ने बताया कि ये यूनिटें कहां लगाई जाएंगी और किन कंपनियों की तरफ से लगाई जाएंगी, इसका फैसला बाद में होगा। लेकिन इससे 33,400 लोगों को प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर नौकरियां मिलेंगी।

इतना तय है कि इन संयंत्रों में सख्त अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया जाएगा। स्वच्छ ऊर्जा और मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत ये संयंत्र लगाए जाएंगे।कई मायने में एतिहासिक फैसलाकई मायने में सरकार का यह फैसला अहम है।

हाल के दिनों में किसी भी देश की तरफ से परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की यह सबसे बड़ी योजना है। मोदी सरकार ने भारत के पहले परमाणु परीक्षण के ठीक 43 वर्षो बाद यह फैसला कर परमाणु कार्यक्रम से जुड़े वैज्ञानिकों, अधिकारियों व राजनेताओं को खास तरीके से धन्यवाद दिया है।

इससे न्यूक्लियर आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता में अड़ंगा डाल रहे देशों को संदेश दिया गया है। भारत को उनकी तकनीक की बहुत दरकार नहीं है।

यह एनएसजी के लिए फायदे की बात है कि एक अहम तकनीक वाले देश को सदस्यता दी जाए। हालांकि 700 मेगावाट से ज्यादा क्षमता के रिएक्टरों के लिए भारत अभी दूसरे देशों की तरफ देखेगा।

इसके साथ ही भारत को परमाणु ऊर्जा तकनीक देने वाले देशों को यह संकेत दिया गया है कि उनकी हर मांग पूरी करने के लिए वह बाध्य नहीं होगा।

देश में अभी कनाडा और रूस की मदद से परमाणु बिजली संयंत्र स्थापित किए गए हैं। अमेरिकी मदद से परमाणु बिजली संयंत्र लगाने का समझौता हो चुका है, लेकिन जमीन पर बहुत ज्यादा काम नहीं हुआ है। उच्चपदस्थ सूत्रों का कहना है कि सभी परमाणु इकाइयों को समयबद्ध कार्यक्रम के तहत संभवत: वर्ष 2024 तक पूरा कर लिया जाएगा।

इससे देश की मौजूदा परमाणु बिजली क्षमता को तीन गुणा किया जा सकेगा। भारत अभी परमाणु ऊर्जा से 6780 मेगावाट बिजली बनाता है और 6700 मेगावाट क्षमता पर काम चल रहा है। वर्ष 2021-22 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है।

बुधवार को स्वीकृत परियोजनाओं पर काम शुरू हो जाएगा और वर्ष 2024-25 तक पूरा कर लिया जाएगा। वैसे वर्ष 2030 तक भारत परमाणु ऊर्जा से 35 हजार मेगावाट और वर्ष 2050 तक 60 हजार मेगावाट बिजली बनाने की योजना बना चुका है।

क्या है पीएचडब्लूआर

भारत में लगाए गए तमाम परमाणु ऊर्जा संयंत्र इसी तकनीक के आधार पर लगाए गए हैं। इसमें प्राकृतिक यूरेनियम को मुख्य ईधन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है जबकि हेवी वाटर को पूरी प्रक्रिया में एक संचालक या कूलेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। भारत इस तकनीक से 700 मेगावाट क्षमता तक बिजली बनाने का संयंत्र लगा सकता है।