नई दिल्ली। 17वीं लोकसभा के पहले ही सत्र में सरकार कई तत्काल तीन तलाक और कश्मीर आरक्षण विधेयक पेश करेगी। बुधवार को PM नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में उक्त विधेयकों समेत केंद्रीय शैक्षिक संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति के विधेयक को भी मंजूरी दे दी गई। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि विपक्षी दलों की ओर से इन विधेयकों को लेकर जो आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं, उनका संज्ञान लिया जाएगा।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में हुए अन्‍य फैसले

- केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती के लिए आरक्षण में विभाग की बजाय विश्वविद्यालय को इकाई माना गया है। इलाहाबाद कोर्ट के फैसले में विभाग को इकाई बनाया गया था जिसका राजनीतिक रूप से विरोध हुआ था। नए विधेयक में भर्ती के पुराने आरक्षण के साथ आर्थिक आधार पर दिए गए 10 फीसद आरक्षण को भी शामिल कर लिया गया है।

- जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले लोग भी प्रत्यक्ष भर्ती, पदोन्नति और विभिन्न पेशेवर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आरक्षण पा सकते हैं। इस प्रावधान से आरक्षण का लाभ 435 गांवों समेत 3.5 लाख से अधिक लोगों को मिलेगा।

- आधार को स्वैच्छिक तौर पर पहचान पत्र मानने वाले आधार संशोधन विधेयक-2019 को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। यह विधेयक पारित होने के बाद पहले से जारी अध्यादेश की जगह लेगा। एसईजेड संशोधन विधेयक के जरिये इसका प्रावधान होगा कि केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत कोई भी ट्रस्ट एसईजेड में इकाई स्थापित कर सकेगा।



जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि छह महीने और बढ़ी

जम्मू-कश्मीर में लगे राष्ट्रपति शासन की अवधि को केंद्र सरकार ने छह महीने के लिए और बढ़ा दिया है। इसकी अवधि दो जुलाई, 2019 को खत्म हो रही है।

कैबिनेट बैठक में इस विस्तार को मंजूरी दी गई। 17 जून से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में सरकार इसे लेकर प्रस्ताव भी लाएगी। जम्मू-कश्मीर में पिछले साल 21 नवंबर को विधानसभा भंग होने के बाद से राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है।