लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (कंपनी) प्रबंधन की खराब कार्य प्रणाली एक बार फिर उजागर हुई है। नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (सीएजी) की रविवार को विधानसभा में पेश हुई रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि प्रबंधन द्वारा अप्रभावी अनुश्रवण व नियंत्रण के कारण समय से बिजली घरों के सही से न चलने से अरबों रुपये का चूना लगा है।

रिपोर्ट में हरदुआगंज ताप विद्युत गृह (एचटीपीएस) के लेखापरीक्षा के आधार पर कहा गया है कि समय से काम न होने, खराब गुणवत्ता और तय मानकों पर खरा न उतरने के कारण विभिन्न यूनिटों से साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

मसलन, बार-बार ट्रिपिंग व तकनीकी खराबी से यूनिट नंबर पांच, आठ व नौ के न चलने से 2128 मिलियन यूनिट (एमयू) बिजली के न पैदा होने से 951.47 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। आठ व नौ नंबर यूनिट के समय से न शुरू होने न केवल उसकी लागत 1900 से 3168.36 करोड़ पहुंच गई बल्कि 111 करोड़ रुपये प्रोत्साहन राशि से भी प्रबंधन को हाथ धोना पड़ा है। कर्मचारियों द्वारा खराब संचालन से यूनिट आठ का जनरेटर आदि खराब होने पर 31.40 करोड़ रुपये और खर्च करने पड़े।

रिपोर्ट में बीएचईएल पर भी सवाल उठाते हुए कहा गया है कि उसके द्वारा खराब गुणवत्ता का ब्यॉलर ट्यूब आपूर्ति किए जाने के कारण आठ व नौ नंबर यूनिट में आए दिन लीकेज से 250 एमयू बिजली का नुकसान होने के साथ ही 1.94 करोड़ रुपये उसे हटाने पर खर्च करना पड़ा। यूनिट सात के आधुनिकीकरण के काम में 298.23 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी बीएचईएल की लापरवाही से छह वर्ष से ज्यादा गुजरने के बावजूद काम नहीं पूरा हो सका।

35.69 करोड़ की मुफ्त में दे दी फ्लाई ऐश

सीएजी ने जांच में पाया कि हरदुआगंज तापीय परियोजना की 8.56 लाख एमटी फ्लाई ऐश को मुफ्त में ही फर्मों को दे देने से भी 35.69 करोड़ रुपये का चूना लगा है। गौरतलब है कि एनटीपीसी दादरी प्लांट की फ्लाई ऐश को 417 रुपये प्रति एमटी की दर से बेच रहा है।

प्रदूषण भी फैलाता रहा बिजली घर

हरदुआगंज बिजली घर वायु एवं ध्वनि प्रदूषण फैलाने में भी पीछे नहीं रहा है। लेखा परीक्षा के दौरान पाया गया कि प्रबंधन प्रदूषण नियंत्रण करने में फेल रहा। स्थिति यह रही कि बिजली घर की यूनिट नंबर पांच में सस्पेंडेड पार्टीकुलेट मैटर 110 एमजी प्रति घन एनएम के मानक से बहुत अधिक 3492-11041 तक रहा और ध्वनि प्रदूषण 75 डीबी के मानक से 51.2-102.7 डीबी तक रहा।