नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले घाटी में स्थायी शांति की तलाश का संदेश देने के लिए केंद्र सरकार ने रमजान के दौरान आतंकियों के खिलाफ आपरेशन बंद करने का फैसला किया है। लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि यदि सुरक्षा बलों या आम नागरिक पर आतंकी हमला करते हैं, तो उसका मुंहतोड़ जबाव दिया जाएगा। यही नहीं, सीमा पर घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई भी पहले की तरह जारी रहेगी। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मू एवं कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को केंद्र के फैसले के बारे में बता दिया है।

गुरुवार को शुरू होने जा रहे रमजान के महीने के ठीक एक दिन पहले बुधवार को गृह मंत्रालय की ओर से किए गए ट्वीट में इसकी जानकारी दी गई है। गृह मंत्रालय ने कहा है, "मुस्लिम समाज के लोगों को रमजान के दौरान शांति व्यवस्था में सहयोग देने के लिए घाटी में सुरक्षा बलों को रमजान के दौरान कोई नया आपरेशन शुरू नहीं करने का निर्देश दिया गया है।

वहीं अगले ट्वीट में मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा बलों के पास कश्मीर में लोगों की सुरक्षा करने और खुद पर हुए हमलों का जवाब देने के लिए किसी भी तरह का फैसला लेने का अधिकार है और वह इसके लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। केंद्र ने उम्मीद जताई है कि सभी लोग इसमें सहयोग करेंगे, ताकि मुस्लिम समाज के भाई-बहन बिना किसी व्यवधान के रमजान का पाक महीना मना सकें। वहीं केंद्र ने यह भी साफ कर दिया है कि यह सीजफायर नहीं है, बल्कि सस्पेंशन आफ आपरेशन है। यानी रमजान के बाद आतंकियों के खिलाफ आपरेशन फिर से जारी रहेगा।


गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि रमजान के पवित्र महीने में आपरेशन बंद करने का फैसला केंद्र सरकार का अपना है और इसका महबूबा मुफ्ती की मांग से कोई लेना-देना नहीं है। गौरतलब है कि महबूबा मुफ्ती ने इसी तरह की मांग की थी, लेकिन उनकी सरकार के उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता कवींद्र गुप्ता ने इसे खारिज कर दिया था। महबूबा मुफ्ती ने भी इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह को धन्यवाद दिया है।

गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, आपरेशन रोककर केंद्र घाटी के लोगों को यह संदेश चाहता है कि सरकार वहां स्थायी शांति के पक्ष में है। लेकिन चंद लोग इसके खिलाफ हैं। इसीलिए सुरक्षा बलों और आम नागरिकों पर हमला करने वाले आतंकियों के खिलाफ आपरेशन का विकल्प खुला रखा गया है।