नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सीमा पर रावी नदी पर शाहपुर कंडी बांध परियोजना को मंजूरी दे दी है। पंजाब सरकार और केंद्र इस परियोजना को 2022 तक पूरी कर लेगी। इस कदम से भारत को उस फालतू बहने वाले पानी को रोककर इस्तेमाल कर सकेगा, जो मधोपुर हेडवर्क्स से होते हुए पाकिस्तान में चला जाता है। इस प्रोजेक्ट के पूरा हो जाने के बाद कृषि क्षेत्र में बड़ा सुधार हो सकेगा।

हालांकि, इस प्रोजेक्ट को बनाने की योजना 17 साल पहले बनी थी। मगर, राज्य सरकार के पास फंड की कमी होने की वजह से इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। अब इस प्रोजेक्ट पर करीब 2,285 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार 485.38 करोड़ रुपए की सहायता भी देगी। बांध बनने के बाद पंजाब में पांच हजार हेक्टेयर जबकि जम्मू-कश्मीर में 32 हजार 172 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो सकेगी।

इससे जम्मू संभाग में कई दशक पहले देखे गए हरित क्रांति का सपना पूरा होगा। इस परियोजना को 2018-19 से लेकर 2022-23 तक यानी पांच सालों में बनाकर तैयार किया जाएगा। इस संबंध में केंद्रीय कैबिनेट ने निर्णय लिया है। केंद्र सरकार ने भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए इस बांध को बनाने के संबंध में फैसला लिया है।

साल 1960 में हुए इस समझौते के अतंर्गत भारत को तीन पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलुज के पानी का पूरा इस्तेमाल करने का अधिकार है। इस परियोजना के पूरा होने से पंजाब की 5000 हेक्टेयर और जम्मू-कश्मीर की 32,173 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन की सिंचाई संभव हो जाएगी।

पंजाब इसके जरिए 206 मेगावाट की हाईड्रो पावर पैदा कर पाएगा। साल 2001 के नवंबर में ही योजना आयोग (अब नीति आयोग) ने इस परियोजना को शुरुआती स्वीकृति दे दी थी। इस परियोजना की संशोधित लागत को अगस्त 2009 में जल संसाधन मंत्रालय की सलाहकार समिति से अगस्त 2009 में स्वीकृति भी मिल गई थी।

बांध परियोजना के लिए केंद्र सरकार से दी जाने वाली राशि नाबार्ड के जरिए खर्च की जाएगी। सितंबर 2018 में पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच हुए समझौते के मुताबिक, पंजाब और राज्य के अधिकारियों के अलावा केंद्र सरकार के प्रतिनिधि भी निर्माण और नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसके लिए यहां तैनात रहेंगे।