संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। अगर आप अक्सर डेबिट या क्रेडिट कार्ड से भुगतान करते हैं तो अगली बार भुगतान की रसीद को हाथ में लेने से पहले अच्छी तरह सोच लें। इस रसीद के पेपर पर खतरनाक केमिकल होता है जो आपको कई रोगों का शिकार बना सकता है।

टॉक्सिक लिंक की नई शोध रिपोर्ट में सामने आया है कि रसीद के इस पेपर में खतरनाक केमिकल बिसफिनॉल-ए (बीपीए) काफी अधिक मात्रा में मिला होता है। इसका इस्तेमाल थर्मल पेपर, कैश रजिस्टर पेपर और सेल रिसिप्ट आदि में होता है। टॉक्सिक लिंक ने दिल्ली से 12 अप्रयुक्त थर्मल पेपरों के सैंपल एकत्रित किए। यह सैंपल लोकल ब्रांड से लेकर इन्हें बनाने वाले और इनकी आपूर्ति करने वालों से भी लिए गए। इसके बाद इनकी जांच कराकर रिपोर्ट तैयार की गई।

टॉक्सिक लिंक के कार्यक्रम समन्वयक प्रशांत राजांकर ने बताया कि इन सैंपल को जांच के लिए बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ बॉयोटेक्नोलॉजी में भेजा गया। इनकी जांच गैस क्रोमेटोग्राफी से की गई। इसमें थर्मल पेपर में बीपीए की मात्रा 300 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) से 6600 पीपीएम तक मिली। यानी थर्मल पेपर में बीपीए की औसत मात्रा 3037 पीपीएम थी। यह तय मानकों से काफी अधिक है और पर्यावरण ही नहीं, स्वास्थ्य के लिए भी काफी खतरनाक है। कई देशों में बीपीए की निर्धारित औसत मात्रा 200 पीपीएम है।

टॉक्सिक लिंक के वरिष्ठ कार्यक्रम समन्वयक पीयूष महापात्रा ने बताया कि जापान, बेल्जियम, डेनमार्क, कनाडा और फ्रांस जैसे देशों में थर्मल पेपर में बीपीए के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है। थर्मल पेपर का सबसे अधिक इस्तेमाल सेल रिसिप्ट के प्रिंट में होता है। मॉल से लेकर गैस फिलिंग स्टेशन, पेट्रोल पंप, एटीएम, टिकटिंग एजेंसी और कई तरह के व्यापार में इसका इस्तेमाल होता है।

बीपीए की पहचान एंडोक्राइन डिसरप्टिंग केमिकल के तौर पर होती है, जिसका सेहत पर काफी बुरा असर होता है। इससे थायराइड के साथ मोटापा, मधुमेह, दिल की बीमारी, लिवर और किडनी आदि की समस्याएं भी हो सकती हैं। 2015 में भारतीय मानक ब्यूरो ने बच्चों की दूध पीने की बोतल से बीपीए को बाहर कर दिया है, ताकि उनके स्वास्थ्य पर इसका गलत असर न पड़े।

हालांकि, बीपीए का अब भी थर्मल पेपरों में इस्तेमाल हो रहा है। भारत में थर्मल पेपर के लिए अगल से निपटान की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसकी वजह से इस केमिकल का असर वातावरण पर काफी अधिक पड़ रहा है। इस रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत में थर्मल पेपर में बीपीए को नियंत्रित किया जाए और इसके लिए किसी सुरक्षित विकल्प को अपनाया जाए, ताकि बीपीए से होने वाले नुकसान से पर्यावरण और इंसान को बचाया जा सके।