चेन्नई। चेन्नई में पानी की कमी से हाहाकार मचा हुआ है। लोगों को पीने तक का पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। पिछले दिनों पानी की कमी के चलते जहां IT कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को घर से काम करने को कह दिया गया था, वहीं अब शहर के व्यस्त इलाकों में चल रहे होस्टल्स पर पानी की कमी का असर दिखाई देने लगा है।

पिछले कुछ दिनों से पीने के पानी की उपलब्धता ना होने के बाद 100 होस्टल बंद हो गए हैं। ये घटनाक्रम तब सामने आया है जब तमिलनाडु सरकार ने दावा किया है कि शहर में पानी की किल्लत नहीं है। इतना ही नहीं सरकार के नुमाइंदों द्वारा मीडिया द्वारा पानी की कमी का भ्रम पैदा करने की बात तक कही गई थी। पानी की कमी के मामले में मद्रास हाईकोर्ट भी राज्य सरकार को ग्राउंड वॉटर सहेजने को लेकर दिए गए जवाब के बाद फटकार लगा चुकी है।

वहीं मेट्रोवॉटर के एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि 'हमें साफ निर्देश दिए गए हैं कि पानी सप्लाई में सरकारी जरुरतों के साथ ही वीआइपी और प्रभावी रिहाइशी इलाकों को प्राथमिकता दी जाए। अधिकारी ने कहा कि इन इलाकों में निर्बाध सप्लाई की वजह से अन्य क्षेत्रों में पानी पहुंचाने में देरी हो रही है। '

वहीं दूसरी ओर, चेन्नई की होस्टल ऑनर्स वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि एसोसिएशन के 100 से ज्यादा सदस्यों ने पानी की कमी की वजह से अपने होस्टल बंद कर रह रहे लोगों को जाने को कह दिया है। एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी केएस मनोहरन ने बताया कि उन्हें खुद पानी की कमी की वजह से अपने दो होस्टलों को बंद करना पड़ा है। होस्टल में रह रहे कई लोगों ने होस्टल से जाने से मना कर दिया है क्योंकि उनके पास किसी अन्य जगह जाने का विकल्प नहीं है।

इसके साथ ही राज्य स्तरीय होस्टल ऑर्गेनाइजेशन, तमिलनाडु होस्टल ऑनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने चेन्नई में मौजूद 200 होस्टल्स में से 15 लेडिज़ होस्टल्स को बंद करने की घोषणा कर दी है। एसोसिएशन की अध्यक्ष शोभना महादेवन का कहना है कि वॉटर टैंकर्स 20 दिन में एक बार आ रहे हैं, ऐसे में होस्टल चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। पानी की भारी किल्लत के चलते टैंकर चालकों ने भी टैंकर का रेट दो से तीन गुना तक कर दिया है।

बता दें कि पिछले दिनों एक दर्जन से ज्यादा आइटी कंपनियों ने अपने 5 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को घर से काम करने के निर्देश दे दिए हैं।