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    सीमा पर चीन बना रहा दबाव लेकिन हम रणनीति नहीं चलने देंगेः आर्मी चीफ

    Published: Fri, 12 Jan 2018 03:03 PM (IST) | Updated: Sat, 13 Jan 2018 12:41 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    नई दिल्ली। भारतीय सेना के प्रमुख बिपिन रावत ने शुक्रवार को कहा की चीन सीमा पर दबाव बनाने का काम कर रहा है और हमारी कोशिश है कि स्थिति ना बिगड़े, हम सीमा पर चीन की यह दबाव वाली रणनीति नहीं चलने देंगे। सेना प्रमुख ने यह बातें डीआरडीओ कार्यशाला और सीबीआरएन रक्षा प्रौद्योगिकियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए कही। इस दौरान उन्होंने सीमा पर सुरक्षा, घुसपैठ, कश्मीर में आतंकरोधी ऑपरेशन आदी पर भी बात रखी।

    उन्होंने कहा कि पहले भी स्थिति बिगड़ी थी और हमने उसे संभाला था। हमारी सेना लगातार सीमा पर गश्त कर रही है। वहीं पाक सीमा को लेकर उन्होंने कहा कि वहां भी गश्त बढ़ी है और हमने जितने जवान खोए हैं उससे दो से तीन गुना पाक सैनिक मारे हैं।

    उन्होंने कहा कि सीबीआरएन हथियारों का इस्तेमाल मानव जगत और व्यापार जगत को खतरे में डाल सकता है। जिसकी भरपाई करने में एक लंबा समय लग जाएगा। खतरनाक हथियारों से निपटने के लिए, रावत ने "सुरक्षा तकनीकों, उपकरणों और प्रणालियों को विकसित करने और सैनिकों को प्रशिक्षण प्रदान करने का सुझाव दिया।" इससे पहले भी सेना प्रमुख ने हथियारों के इस्तेमाल पर खुलकर अपने विचार रखे हैं। उन्होंने हमेशा से हथियारों के इस्तेमाल में भी 'मेड इन इंडिया' पर जोर दिया है।

    सेना प्रमुख ने स्वदेशी हथियारों पर दिया था जोर

    पिछले दिनों नई दिल्ली में आयोजित इस सेमिनार में सेना प्रमुख ने स्वदेशी हथियारों के इस्तेमाल पर जोर दिया था। आर्मी टेक्नोलॉजी सेमिनार में सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा कि हर क्षेत्र में हमारे सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की बहुत बड़ी आवश्यकता है। भविष्य में होने वाले युद्ध कठिन क्षेत्रों और परिस्थितियों में लड़े जाएंगे, ऐसे में हमें उनके लिए तैयार रहना होगा।

    उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हम हथियारों के आयात से आगे बढ़ें। बिपिन रावत ने कहा कि हमें हल्के वज़न के बुलेट प्रूफ हथियार और ईंधन सेल तकनीक की जरूरत है। हमें पूरी उम्मीद है कि अगर हमें इंडस्ट्री का सपोर्ट मिलता है तो हम इस राह में एक कदम और आगे बढ़ेंगे।

    भारतीय फौज को और मजबूत बनाने की जरुरत

    बता दें कि देश में लगातार 'मेड इन इंडिया' के तहत हथियारों को बनाने का काम चल रहा है। बीते कुछ वक्त में ऐसी कई डील हुई हैं, जो कि देश में ही हथियारों को बनाने पर काम करेंगी। भारतीय फौज दुनिया की सर्वोत्तम सेनाओं में से एक है। हाल ही में डीआरडीओ में बोलते हुए सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा था कि मौजूदा समय में भारतीय फौज को और ज्यादा पेशेवर बनाने की जरूरत है।

    आधुनिकीकरण के रास्ते पर चल कर हम अपनी फौज को और सक्षम बना सकते हैं। जनरल बिपिन रावत ने कहा कि डीआरडीओ की तरफ से फौज को महत्वपूर्ण मदद मिल रही है। लेकिन अनुसंधान में और तेजी लाने की जरूरत है ताकि व्यवसायिक तौर पर स्वदेशी हथियार प्रणाली का विकास हो सके। उन्होंने कहा कि रक्षा सौदों में विदेशी देशों पर निर्भरता कम करनी होगी।

    भारतीय फौज की ताकत

    भारतीय सेना में सैनिकों की संख्या करीब 13 लाख है, जबकि पाकिस्तानी सेना उससे करीब आधी यानि साढ़े छह लाख है। भारतीय सेना की ताकत उसके सैनिक तो हैं ही साथ ही उसके पास बड़ी आर्मर्ड-ब्रिगेड और मैकेनाइजाईड इंफेंट्री इस ब्रिगेड में है भारतीय सेना के मैन बैटल ( main battle tank) टैंक अर्जुन और भीष्म हैं।

    पाकिस्तान के पास तीन हजार ( 3000) टैंक हैं। जबकि भारतीय सेना के पास करीब छह हजार टैंक हैं जिसमें चार हजार ( 4000) आर्मड कैरियर और बीएमपी मशीन हैं। दुश्मन की सीमा में अगर ये टैंक घुस जाएं तो इनकी गर्जना से ही दुश्मन भाग खड़े होते हैं।

    भारतीय सेना के पास सात हजार ( 7000) तोप हैं। इन तोपों में वे बोफोर्स तोप भी शामिल हैं जिन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी घुसपैठिए और सैनिकों पर इतने गोले बरसाए कि दुश्मन को मैदान छोड़कर भागना पड़ा।

    शहीदों के बच्चों के लिए दो स्कूल खोलेगी सेना-

    सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा कि शहीदों के बच्चों के लिए आवासीय स्कूल खोलने पर सरकार ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस स्कूल में कार्रवाई के दौरान अपंग हो गए सैनिकों के बच्चों का भी दाखिला किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा शहीदों और कार्रवाई के दौरान अपंग हुए सैनिकों के बच्चों को मिलने वाली शिक्षा सहायता राशि प्रतिमाह 10,000 रुपये निर्धारित कर दिए जाने को ध्यान में रखकर यह कदम उठाया जा रहा है। सेना प्रमुख ने कहा कि स्कूल के संचालन में आ जाने के बाद सरकार से शिक्षा सहायता योजना वापस लेने के लिए कहा जा सकता है।

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