माला दीक्षित, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राजनीति के अपराधीकरण पर चिंता जताते गुरुवार को कहा कि राजनीति में अपराधियों का प्रवेश नहीं होना चाहिए। यह समाज और नागरिकों की सामूहिक सोच और पुकार है, जिसे संसद नजरअंदाज नहीं कर सकती।

हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ताओंको कोर्ट के क्षेत्राधिकार की लक्ष्मण रेखा याद दिलाते हुए कहा कि विधायिका कानून बनाती है और कोर्ट उसकी व्याख्या करता है। कोर्ट कानून नहीं बना सकती। ये टिप्पणियां प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने राजनीति का अपराधीकरण रोकने की मांग वाली जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कीं।

सुप्रीम कोर्ट में कई जनहित याचिकाएं लंबित हैं, जिनमें गंभीर अपराध में अदालत से आरोप तय होने पर व्यक्ति के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग की गई है। गुरुवार को इस मामले पर सुनवाई शुरू हुई।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील दिनेश द्विवेदी ने जब राजनीति के अपराधीकरण का मुद्दा उठाया और इस बारे में विधि आयोग और विभिन्न समितियों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप तय होने पर चुनाव लड़ने पर रोक की मांग की तो प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अपराधियों का राजनीतिक व्यवस्था में प्रवेश नहीं होना चाहिए।

ये समाज की पुकार और समय की जरूरत है। समाज की इस सामूहिक सोच को संसद नजरअंदाज नहीं कर सकती। कोर्ट ने पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि भ्रष्टाचार राजनीति में घर कर गया है और उस पर अंकुश लगना चाहिए।