नवनीत शर्मा,मेरठ। सदियों से मां-बाप बेटियों को अपने दर से ससुराल के लिए विदा करते आए हैं लेकिन मेरठ में इससे उलट वाकया सामने आया। यहां बेटियां बाबुल के किरदार में नजर आईं। इन बेटियों ने अपनी विधवा मां की सूनी मांग को फिर से रंग-बिरंगी कर दिया।

दरअसल, बेटे ने अपनी मां को घर से निकाल दिया था। बदनसीब मां को उसकी दो बेटियों ने गले ही नहीं लगाया बल्कि गुरुवार को उसकी शादी कराकर ससुराल के लिए विदा कर दिया। इस नेक काम में दुनिया वालों ने बाधा डाली लेकिन बेटियों ने हार नहीं मानी।

मेरठ के जागृति विहार निवासी एक महिला के पति की मृत्यु करीब 15 वर्ष पहले हो गई थी। महिला ने मेहनत- मजदूरी कर एक बेटे और दो बेटियों को बड़ा किया। बेटियों को धूमधाम से ससुराल विदा किया। बेटा गलत संगत में पड़ गया। मां से हर दिन बुरा बर्ताव करने लगा।

सप्ताहभर पहले आवारा बेटे ने अपनी मां को मारपीट कर घर से निकाल दिया। आए दिन मां को अपमानित किए जाने से आहत बेटियों ने मां के कन्यादान का फैसला किया और वर की तलाश शुरू कर दी। इस दौरान सहारनपुर निवासी रिश्तेदारी का ही एक व्यक्ति शादी के लिए तैयार हो गया। इस व्यक्ति की पत्नी की मौत हो चुकी थी।

दोनों बेटियों ने मां को भी शादी के लिए मना लिया। कई रिश्तेदार मदद के बजाय विरोध पर उतर आए। बेटियों ने हार नहीं मानी और खुद ही कन्यादान करने का फैसला लिया।गुरुवार को बेटियों ने मां की विधिवत शादी कराई और ससुराल के लिए विदा कर दिया।

समाज से ज्यादा मां की खुशी सर्वोपरि

विधवा की शादी को लेकर क्षेत्र में कई लोग बेटियों की तारीफ के पुल बांध रहे हैं। पूछे जाने पर बेटियों ने बताया कि भाई के बर्ताव से मां दुखी थीं और हम आहत। ऐसे में समाज की सोच से अधिक मां की खुशी को देखते हुए शादी कराने का निर्णय लिया।