नई दिल्ली, एजेंसी। दिल्‍ली-जयपुर एक्‍सप्रेसवे का निर्माण इसी वर्ष सितंबर में शुरू हो जाने की उम्‍मीद है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से परियोजना के बाबत 28 फरवरी तक कैबिनेट की सैद्धांतिक मंजूरी लेने के लिए कैबिनेट नोट तैयार करने को कहा है।

लगभग 11,750 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 272 किलोमीटर लंबी यह परियोजना देश की पहली एक्सप्रेसवे परियोजना है जिसका निर्माण केंद्र सरकार खुद कराएगी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ओर से नवंबर में किए गए एलान के मुताबिक सरकार ने इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध ढंग से पूरी की जाने वाली परियोजनाओं में शामिल किया है।

फिलहाल देश में कोई भी एक्सप्रेसवे ऐसा नहीं है जिसका निर्माण सरकार ने अकेले अपने बूते कराया हो। सभी एक्सप्रेसवे परियोजनाएं या तो केंद्र या राज्य सरकारों की ओर से निजी क्षेत्र की भागीदारी (पीपीपी) में पूरी की गई हैं। यह पहला मौका है जब केंद्र सरकार अपने बूते एक्सप्रेसवे निर्माण के क्षेत्र में उतर रही है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पिछले साल नवंबर में बिजली, सड़क, रेल, हवाई अड्डा और बंदरगाह क्षेत्र की कुछ परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध ढंग से पूरा करने का एलान किया था। दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेसवे को इन्हीं परियोजनाओं में शामिल किया गया है।

इस पर अनुमानित कुल लागत में से निर्माण कार्यों पर 9,460 करोड़ रुपये का खर्च, जबकि बाकी खर्च जमीन अधिग्रहण पर आएगा। राजमार्ग मंत्रालय 28 फरवरी तक स्टेट सपोर्ट एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर देगा। इसके बाद की प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए सितंबर 2014 तक एक्सप्रेसवे का निर्माण शुरू होने की संभावना है।

राजमार्ग मंत्रालय ने परियोजना के वित्त पोषण के कई विकल्पों पर वचार किया है। इनमें से सबसे उपयुक्त विकल्प का चुनाव किया जाएगा। यदि यह कामयाब रहा तो दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेसवे के परियोजना मॉडल को उन सभी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में अपनाया जाएगा जो मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्गों के समानांतर बनाए जाने हैं। दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेसवे का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग-8 के दिल्ली-जयपुर खंड के समानांतर किया जाना है।