नई दिल्ली/कोलकाता। कोलकाता के NRS अस्पताल में डॉक्टरों से मारपीट के बाद बंगाल से शुरू हुई डॉक्टरों की हड़ताल ने नया मोड़ ले लिया है। हड़ताली डॉक्टर्स ने ममता बनर्जी से मिलने से इनकार करते हुए माफी की मांग की है।

वहीं दूसरी तरफ दिल्ली एम्स के रेसिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने पश्चिम बंगाल सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। एसोसिएशन ने कहा है कि हम ममता सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हैं कि वो हड़ताली डॉक्टरों की मांग पूरी करें, अगर ऐसा नहीं होता तो हम मजबूरन अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाना होगा।

दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भी हड़ताल का असर जारी है और इस वजह से मरीजों की हालत खराब है। अस्पताल के मेडिकल सुपरींटेंडेंट वीके तिवारी के अनुसार सभी रेसिडेंट डॉक्टर्स हड़ताल पर है। उन्होंने केवल ओपीडी और वार्ड्स में काम बंद किया है लेकिन इमरजेंसी सेवाएं जारी हैं। हम पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा की निंदा करते हैं।

इससे पहले शुक्रवार को हड़ताल में देश भर के डॉक्टरों के शामिल हो जाने से मरीजों की जान पर बन आई। इलाज नहीं मिलने से बंगाल में ही पांच मरीजों की मौत हो गई है। बंगाल, मध्य प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, झारखंड, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, छत्तीसगढ़, तेलंगाना व राजस्थान सहित कई राज्यों में ओपीडी सुविधाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। विरोध में सैकड़ों डॉक्टरों ने इस्तीफे दे दिए हैं। अकेले बंगाल में ही करीब 700 डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ दी है। कुछ राज्यों में काली पट्टी बांध तो कुछ में विरोध स्वरूप हेलमेट पहनकर डॉक्टर मरीजों का इलाज करते नजर आए।

एम्स के हड़ताली डॉक्टरों की टीम ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन से मुलाकात की जिसके बाद स्वास्थ्य मंत्री ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने को कहा है। इस बीच, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने 17 जून को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इस मामले में हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर कोई भी अंतरिम आदेश देने से इनकार करते हुए कोर्ट ने ममता सरकार से कार्रवाई की जानकारी मांगी है। जबकि डॉक्टरों की सुरक्षा की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है। उधर, टोक्यो स्थित वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन ने भी डॉक्टरों के आंदोलन का समर्थन किया है।

सीएम के सामने रखीं छह शर्तें

हड़ताली डॉक्टरों को चेतावनी देने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट लिखकर डॉक्टरों को मनाने की कोशिश की, मगर वे हड़ताल पर अडिग हैं। उन्होंने ममता बनर्जी के सामने माफी मांगने समेत छह शर्तें रखी हैं।

'अपने' ही उठा रहे ममता बनर्जी के रवैये पर सवाल

अस्पतालों में सुरक्षा की मांग पर आंदोलन कर रहे जूनियर डॉक्टरों को "बाहरी" कहने वालीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को शायद ही इस बात का अंदाजा था कि इसमें उनके कुछ "अपने लोग" भी शामिल हैं। ममता के भाई कार्तिक के बेटे आबेश भी इन्हीं में से एक हैं। वहीं ममता के बेहद करीबी माने जाने वाले राज्य के शहरी विकास मंत्री एवं कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम की बेटी शाब्बा हकीम पहले ही जूनियर डाक्टरों के समर्थन में आवाज बुलंद कर चुकी हैं। आबेश भी इस आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हैं।

आबेश, जो एक मेडिकल छात्र और केपीसी मेडिकल कॉलेज स्टूडेट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं, जादवपुर स्थित केपीसी मेडिकल कालेज अस्पताल से नीलरतन सरकार मेडिकल कॉलेज अस्पताल तक निकाली गई रैली में शामिल हुए थे। उन्होंने हाथों में एक बैनर लिया हुआ था, जिसमें लिखा था-"आप कहते हैं कि हम भगवान हैं! हमारे साथ कुत्तों की तरह बर्ताव क्यों कर रहे हैं? डॉक्टरों के खिलाफ हिसा बंद कीजिए। केपीसीएमसीएच एनआरएस के साथ है।" आबेश के विरोध का वीडियो सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है।