नई दिल्ली। सरकार ने इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आइएसबी) हैदराबाद के प्रोफेसर और कार्यकारी निदेशक को मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति तीन वर्षों के लिए प्रभावी होगी। सरकार ने शुक्रवार को इस आशय की अधिसूचना जारी कर दी। हालांकि अभी यह नहीं बताया गया है कि वे कब से कार्यभार ग्रहण करेंगे।

अरविंद सुब्रमणियन का कार्यकाल खत्म होने के बाद इस वर्ष जुलाई में सरकार ने सीईए के लिए आवेदन मांगे थे। अधिसूचना में सरकार ने कहा कि कैबिनेट की अप्वाइंटमेंट समिति (एसीसी) ने आइएसबी में एसोसिएट प्रोफेसर और कार्यकारी निदेशक कृष्णमूर्ति सुब्रमणियन की सीईए के पद पर नियुक्ति को अनुमोदन दे दिया है।

दिलचस्प यह है कि सुब्रमणियन ने पूर्व सीईए और सितंबर, 2016 तक आरबीआइ के गवर्नर रहे रघुराम राजन के मार्गदर्शन में वित्तीय अर्थशास्त्र में बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस, शिकागो यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री हासिल की है। आइएसबी की वेबसाइट के मुताबिक आईआईटी और आईआईएम के पूर्व छात्र रहे सुब्रमणियन बैंकिंग, कॉरपोरेट गवर्नेंस और इकोनॉमिक पॉलिसी के महारथी हैं।

वे कॉरपोरेट गवर्नेंस पर पूंजी बाजार नियामक सेबी की विशेषज्ञ समिति और बैंकों के गवर्नेंस पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) की समिति के सदस्य रह चुके हैं। सुब्रमणियन बंधन बैंक, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बैंक मैनेजमेंट तथा आरबीआइ एकेडमी के निदेशक बोर्ड के भी सदस्य रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में आने से पहले वे न्यूयॉर्क में जेपी मॉर्गन चेज के साथ सलाहकार के रूप में जुड़े थे। पीएचडी से पहले उन्होंने शिकागो बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस से ही एमबीए की डिग्री ली।

सीईए की भूमिका

सीईए का मुख्य काम औद्योगिक विकास और विदेश व्यापार जैसे मसलों पर सरकार को सलाह देना है। इस पद पर बैठा व्यक्ति औद्योगिक उत्पादन के नवीन और बदलते ट्रेंड्स का विश्लेषण कर सरकार को जानकारी मुहैया कराता है। वह अर्थव्यवस्था की हालत के बारे में समय-समय पर प्रमुख आंकड़े भी जारी करता है, जिनमें सालाना आर्थिक सर्वे प्रमुख है।