नई दिल्ली। बिहार में बेकाबू होते चमकी बुखार का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। शीर्ष अदालत एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के कहर से बच्चों को बचाने और तत्काल विशेषज्ञों का मेडिकल बोर्ड गठित करने की मांग पर सोमवार को सुनवाई करेगा। चमकी बुखार से बच्चों की हो रही मौतों के मामले में यह जनहित याचिका बिहार के वकील मनोहर प्रताप ने दाखिल की है। प्रदेश में अब तक इस बीमारी से सौ से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस सूर्यकांत की अवकाश कालीन पीठ ने याचिका पर शीघ्र सुनवाई की मांग स्वीकार कर लिया।

याचिका में चमकी बुखार की विकरालता और उसे काबू करने में राज्य सरकार की नाकामी का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार को विशेषज्ञों का एक मेडिकल बोर्ड गठित कर उसे तत्काल बिहार के मुजफ्फरपुर व अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भेजने का निर्देश देने की मांग की गई है। इसके अलावा केंद्र और बिहार सरकार को 500 आइसीयू ऐसे 100 मोबाइल आइसीयू स्थापित करने का निर्देश देने को कहा गया है जो कि विशेषज्ञों से लैस हों जिससे दूर दराज के इलाकों में प्रभावितों को इलाज मुहैया कराया जा सके।

साथ ही बिहार सरकार को विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रख एक आदेश जारी करने का निर्देश देने की मांग की गई है जिसमें प्रभावित क्षेत्रों के निजी अस्पतालों को मुफ्त में इलाज करने को कहा जाए। याचिका में सिर्फ बिहार और केंद्र सरकार के लिए ही निर्देश नहीं मांगे गए हैं बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार को भी इस रोग को रोकने और इससे निपटने के पर्याप्त इंतजाम करने का आदेश देने की मांग की गई है।

यह भी कहा गया है कि सरकारों को निर्देश दिया जाए कि वह इस बीमारी से बचाव और जागरूकता के लिए पर्याप्त प्रचार करें। इसके अलावा जिनके बच्चों की इस बीमारी से मौत हुई है उनके परिजनों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने और बड़ी संख्या में हुई मौतों की जांच के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की गई है जो इसके जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच करेगी।